पादपों में पोषण Class 7 Science Chapter 1 NOTES by Prem sir 9470710586
Chapter 1: पादपों में पोषण
पोषक :- भोजन का प्रमुख कार्य स्वस्थ शरीर के विकास हेतु आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करना है, जो शरीर के विकास एवं विभिन्न क्रियाओं के संचालन हेतु अतिआवश्यक है।
भोजन कई रासायनिक पदार्थों के सम्मिश्रण से बना होता है
1. वसा
2. प्रोटीन
3. विटामिन
4. कार्बोहाइड्रेट
5. खनिज लवण
पोषण :- सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने एवं इसके उपयोग की विधि को पोषण कहते हैं।
स्वपोषी :- जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं ऐसे पादपों को स्वपोषी कहते हैं।
जैसे :- पेड़-पौधे
विषमपोषी :- विषमपोषी वह होता है जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाता है अर्थात् दुसरो पर निर्भर रहता है।
जैसे :- मानव और कोई भी जानवर।
विषमपोषी पोषण दो प्रकार के होते है।
1. मृतजीवी :- जीव किसी मृत एवं विघटित पदार्थों से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं, मृतजीवी पोषण कहलाती है।
जैसे :- मशरूम, कवक और फंजाई आदि।
2. परजीवी :- जीव अपना भोजन अन्य जीवों (परपोषी) के बनाए भोजन पर निर्भर रहते हैं, परजीवी पोषण कहलाती है। जैसे :- अमरबेल
कीटभक्षी :- ऐसे पादप भी है, जो कीटों को पकड़ते हैं तथा उन्हें पचा जाते है ऐसे कीटभक्षी पादप कहलाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण :- हरे पौधें अपना भोजन सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में स्वंय बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
पादप सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से अपना भोजन यानि कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रकाश संश्लेषण के लिए कच्चा माल होते हैं, तथा सूर्य के प्रकाश से इस काम के लिए ऊर्जा मिलती है। प्रकाश संश्लेषण के अंत में कार्बोहाइड्रेट बनता है और ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है। इस प्रक्रिया को नीचे दिए गए समीकरण से दिखाया जाता है।
प्रकाश संश्लेषण के दौरान होने वाली अभिक्रिया का समीकरण :-
कार्बन डाइऑक्साइड + जल (+ सूर्य के प्रकाश क्लोरोफिल) कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन सभी जीवों के लिए सूर्य ऊर्जा का चरम स्रोत है।
सभी जीवों के लिए सूर्य ऊर्जा का चरम स्रोत है।
खाद्य फैक्ट्री :- केवल पादप ही ऐसे जीव हैं, जो जल, कार्बनडाइऑक्साइड एवं खनिज की सहायता से अपना भोजन बना सकते हैं।
पादपों में खाद्य पदार्थों का संश्लेषण उनकी पत्तियों में होता है।
रन्ध्र :- पत्तियों की स्तनों पर छोटे-छोटे छिद्र पाए जाते है जिससे गैसों का आदान-प्रदान होता है। ऐसे छिद्रों को रन्ध्र कब्ते है।
क्लोरोफिल :- पत्तियों में एक हरा वर्णक होता है जिसे क्लोरोफिल कहते हैं।
खाद्य संश्लेषण :- हरे पादप प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम द्वारा अपना खाद्य स्वयं संश्लेषित करते हैं। -हरे पादप कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं खनिज जैसे सरल रासायनिक पदार्थों का उपयोग खाद्य संश्लेषण के लिए करते हैं।
शैवाल :- आपने गीली दीवारों पर, तालाब अथवा ठहरे हुए जलाशय में हरे अवपंकी (काई जैसे पादप) देखें होंगे। ये सामान्यतः कुछ जीवों की वृद्धि के कारण बनते हैं, जिन्हें शैवाल कहते हैं।
राइजोबियम :- राइजोबियम वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को विलय पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं। ये चना, मटर, मूँग, सेम तथा अन्य फलीदार पादपों की जड़ो में रहते हैं तथा उन्हें नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं।
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