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Class 10 Science – जीव जनन कैसे करते हैं?
Full Detailed Subjective Answers (1–10)
Q1. पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन कैसे होता है? विस्तृत में समझाइए।
उत्तर:
पुष्पी पौधों में जनन की प्रक्रिया फूल के माध्यम से होती है। फूल पौधों का प्रजनन अंग होता है जिसमें दो मुख्य संरचनाएँ होती हैं:
1. पुंकेसर (Stamen) – नर जनन अंग
-
इसमें परागकोश होता है।
-
परागकोश में परागकण बनते हैं, जिनमें नर युग्मक (Male gametes) होते हैं।
2. स्त्रीकेसर (Carpel) – मादा जनन अंग
-
इसमें अंडाशय, वर्तिकाग्र, वर्तिका होते हैं।
-
अंडाशय में अंडाणु (Female gametes) होते हैं।
जनन की प्रक्रिया
-
परागण (Pollination):
परागकण का पुंकेसर से स्त्रीकेसर पर जाना परागण कहलाता है।
यह हवा, कीट, पानी आदि द्वारा होता है। -
निषेचन (Fertilization):
परागकण अंडाशय के अंडाणु से मिलते हैं।
नर युग्मक + मादा युग्मक मिलकर जाइगोट (युग्मनज) बनाते हैं। -
जाइगोट का विकास:
जाइगोट बढ़कर भ्रूण बनाता है। -
बीज और फल का निर्माण:
-
अंडाशय → फल
-
अंडाणु → बीज
-
👉 इस प्रकार फूल के माध्यम से पौधों में नई पीढ़ियों का निर्माण होता है।
Q2. मानव मादा जनन तंत्र के अंगों के नाम लिखिए और उनके कार्य बताइए।
उत्तर:
मानव मादा जनन तंत्र में निम्नलिखित अंग होते हैं:
1. अंडाशय (Ovary)
-
दो होते हैं।
-
ये अंडाणु बनाते हैं।
-
यौन हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाते हैं।
2. अंडवाहिनी / फैलोपियन नली (Fallopian Tube)
-
यहीं पर निषेचन होता है।
-
अंडाणु को अंडाशय से गर्भाशय की ओर ले जाती है।
3. गर्भाशय (Uterus)
-
यह एक थैली जैसा अंग है।
-
यहीं भ्रूण का विकास होता है।
-
गर्भावस्था इसी में होती है।
4. योनि (Vagina)
-
यह जनन मार्ग है।
-
प्रसव के समय बच्चा इसी मार्ग से बाहर आता है।
👉 इनमें शुक्रवाहिका पुरुष जनन तंत्र का भाग है, मादा में नहीं पाया जाता।
⭐ Q3. निषेचन क्या है? इसकी प्रक्रिया विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
जब नर युग्मक (Sperm) और मादा युग्मक (Ovum) आपस में मिलते हैं तो इस प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहते हैं।
निषेचन की चरणबद्ध प्रक्रिया:
1. अंडाणु का निर्माण
-
अंडाशय में हर महीने एक अंडाणु बनता है।
2. शुक्राणु का मादा शरीर में प्रवेश
-
यौन संबंध के दौरान लाखों शुक्राणु मादा के शरीर में प्रवेश करते हैं।
-
ये फैलोपियन ट्यूब तक पहुँचते हैं।
3. शुक्राणु और अंडाणु का मिलन
-
फैलोपियन नली में अंडाणु और शुक्राणु मिलते हैं।
-
केवल एक शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश करता है।
4. जाइगोट का निर्माण
नर युग्मक + मादा युग्मक → जाइगोट (युग्मनज)
5. भ्रूण का निर्माण
-
जाइगोट विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
-
भ्रूण गर्भाशय में चिपक कर विकसित होता है।
निष्कर्ष:
निषेचन नई संतान के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
⭐ Q4. एकलिंगी पौधा क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जो पौधे नर और मादा फूल अलग-अलग बनाते हैं वे एकलिंगी पौधे कहलाते हैं।
विशेषताएँ:
-
एक ही पौधे पर केवल नर फूल या केवल मादा फूल होते हैं।
-
इनमें स्वपरागण नहीं होता।
-
परागण के लिए हवा या कीट की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
-
पपीता (Papaya)
-
खजूर
-
बेड़
⭐ Q5. मुकुलन (Budding) क्या है? यीस्ट और हाइड्रा में इसकी प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
मुकुलन में जनक जीव के शरीर पर एक छोटी कली (Bud) निकलती है, जो बढ़कर नया जीव बनाती है।
(A) यीस्ट में मुकुलन
-
यीस्ट एक एककोशीय फफूंद है।
-
इसमें कोशिका की सतह पर छोटी कली उभरती है।
-
यह कली बढ़ती है और अंत में अलग होकर नया यीस्ट बनाती है।
(B) हाइड्रा में मुकुलन
-
हाइड्रा बहुकोशीय जीव है।
-
इसके शरीर पर कली निकलती है।
-
कली में मुख, तंतु बन जाते हैं।
-
यह जल में अलग होकर नया हाइड्रा बनाती है।
⭐ Q6. फूल में नर जनन अंग कौन सा है? उसका कार्य लिखिए।
उत्तर:
फूल का नर जनन अंग पुंकेसर (Stamen) कहलाता है।
पुंकेसर के दो भाग होते हैं:
-
परागकोश (Anther):
-
यह गोलाकार संरचना है।
-
इसमें परागकण बनते हैं।
-
-
पुंकेसर डंडी (Filament):
-
यह परागकोश को सहारा देती है।
-
कार्य:
-
नर युग्मक बनाना
-
परागण में सहायता करना
⭐ Q7. द्विखंडन (Binary Fission) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब एक कोशिका दो बराबर भागों में विभाजित होकर दो नए जीव बनाती है, इसे द्विखंडन कहते हैं।
प्रक्रिया:
-
जीव की कोशिका बढ़ती है।
-
नाभिक दो भागों में विभाजित होता है।
-
कोशिका झिल्ली बीच से कटती है।
-
दो समान नए जीव बन जाते हैं।
उदाहरण:
-
अमीबा
-
पैरामीशियम
⭐ Q8. बहु-विखंडन (Multiple Fission) क्या है? किस जीव में होता है?
उत्तर:
जब एक कोशिका कई भागों में विभाजित होकर एक साथ कई जीव बनाती है, उसे बहु-विखंडन कहते हैं।
कहा होता है:
-
प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) में।
प्रक्रिया:
-
कोशिका के अंदर कई नाभिक बनते हैं।
-
कोशिका फटती है।
-
एक साथ अनेक नए परजीवी बाहर निकलते हैं।
⭐ Q9. ब्रायोफिलम में पत्ती द्वारा जनन कैसे होता है?
उत्तर:
ब्रायोफिलम एक ऐसा पौधा है जिसमें पत्तियों के किनारों पर छोटी-छोटी कलियाँ (Plantlets) बनती हैं।
Process:
-
पत्ती के किनारों पर कलियाँ उभरती हैं।
-
इनमें जड़ और तना विकसित हो जाता है।
-
ये पत्ती से गिरकर मिट्टी में उगती हैं।
-
नया पौधा बन जाता है।
👉 इसे कायिक प्रवर्धन द्वारा जनन कहते हैं।
⭐ Q10. मानव मादा में निषेचन कहाँ होता है? उसकी प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
मानव मादा में निषेचन फैलोपियन नली में होता है।
प्रक्रिया:
-
अंडाशय हर महीने एक अंडाणु छोड़ता है।
-
शुक्राणु मादा शरीर में प्रवेश कर फैलोपियन नली तक पहुँचते हैं।
-
एक शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश करता है।
-
निषेचन होता है और जाइगोट बनता है।
-
जाइगोट विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
-
भ्रूण गर्भाशय में जाकर चिपकता है और विकास शुरू करता है।
⭐ Q11. तने द्वारा कायिक प्रवर्धन किन पौधों में होता है? इसकी प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
कई पौधों में नया पौधा तने से उगाया जाता है, इसे तना द्वारा कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
जहाँ-जहाँ होता है:
-
अदरक
-
हल्दी
-
आलू
-
पोदीना
-
गन्ना
कैसे होता है? (Process)
1. आलू (Potato)
-
आलू के तने में आँखें (buds) नाम की संरचना होती है।
-
इन आँखों से नई शाखाएँ और पौधे बनते हैं।
2. अदरक और हल्दी
-
इनके तने भूमिगत होते हैं जिन्हें कंद (Rhizome) कहते हैं।
-
इन कंदों पर कलियाँ होती हैं।
-
मिट्टी में लगाने पर यह नया पौधा बना देती हैं।
3. गन्ना
-
गन्ने के तने को टुकड़ों में काटकर लगाया जाता है।
-
प्रत्येक टुकड़े में एक गाँठ होती है जो नया पौधा बनाती है।
⭐ Q12. खंडन (Fragmentation) क्या है? किस जीव में होता है?
उत्तर:
खंडन एक अलैंगिक जनन विधि है, जिसमें जीव का शरीर कई भागों में टूटकर प्रत्येक भाग से नया जीव बनता है।
जहाँ होता है:
-
सितारा मछली (Starfish) सबसे प्रमुख उदाहरण है।
Process (कैसे होता है):
-
सितारा मछली का शरीर हाथों जैसी भुजाओं से बना होता है।
-
यदि किसी कारण उसका एक भाग कट जाए,
-
तो उस हिस्से से नई मछली का विकास हो जाता है।
-
इसी प्रकार यदि मुख्य शरीर में से एक भुजा बची हो तो उससे भी पूरा शरीर बन सकता है।
👉 इसे प्राकृतिक पुनर्जनन (Natural Regeneration) भी कहते हैं।
⭐ Q13. कायिक प्रवर्धन क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
कायिक प्रवर्धन एक अलैंगिक जनन विधि है जिसमें पौधे के जड़, तना और पत्ती जैसे अंगों से नया पौधा बनाया जाता है।
किस-किस भाग से होता है:
-
जड़ से: शकरकंद
-
तना से: आलू, अदरक, गन्ना
-
पत्ती से: ब्रायोफिलम
क्यों महत्वपूर्ण है?
-
पौधे जल्दी तैयार होते हैं।
-
फसल की गुणवत्ता अच्छी रहती है।
-
बीज की आवश्यकता नहीं होती।
⭐ Q14. अपस्थानिक कलियाँ क्या हैं? उदाहरण दीजिए। विस्तृत में समझाइए।
उत्तर:
तने पर सामान्य स्थानों से अलग जहाँ कलियाँ बनती हैं, उन्हें अपस्थानिक कलियाँ कहते हैं।
कहाँ पाई जाती हैं?
-
आलू में
-
आलू के तने पर बनी आँखें अपस्थानिक कलियाँ हैं।
उनसे जनन कैसे होता है?
-
आलू की आँखों से नई शाखाएँ निकलती हैं।
-
यह शाखाएँ तने, पत्तियाँ और जड़ें बनाती हैं।
-
धीरे-धीरे नया पूरा पौधा तैयार हो जाता है।
⭐ Q15. हाइड्रा में जनन की विधि क्या है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
हाइड्रा में अलैंगिक जनन प्रमुख रूप से मुकुलन (Budding) द्वारा होता है।
Process:
-
हाइड्रा के शरीर पर एक छोटी उभार (कली) निकलती है।
-
यह बढ़कर छोटे हाइड्रा की आकृति ले लेती है।
-
जब पूरा विकसित हो जाती है, तो यह मुख्य शरीर से अलग होकर नया जीव बन जाती है।
विशेष बात:
-
यह पानी में पाई जाती है।
-
बच्चों के लिए देखने पर यह पौधे जैसी लगती है लेकिन जीव है।
⭐ Q16. यीस्ट में जनन कैसे होता है? उसकी प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
यीस्ट एक एककोशीय फफूंद (Fungus) है, जिसमें जनन मुकुलन (Budding) द्वारा होता है।
Process:
-
कोशिका की सतह पर एक छोटी कली उभरती है।
-
कली का आकार बढ़ता जाता है।
-
कोशिका के अंदर का पदार्थ कली में आता है।
-
कली अलग होकर नया यीस्ट बन जाती है।
👉 इस विधि से यीस्ट बहुत तेजी से बढ़ता है, इसलिए रोटी, दही आदि में उपयोग होता है।
⭐ Q17. मानव मादा जनन तंत्र का कौन सा भाग नहीं है? कारण सहित बताइए।
उत्तर:
शुक्रवाहिका (Vas deferens) मानव मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है।
कारण:
-
शुक्रवाहिका केवल पुरुष में पाई जाती है।
-
यह शुक्राणुओं को संग्रहित व परिवहन करने का काम करती है।
-
मादा जनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय और योनि होते हैं।
⭐ Q18. परागकोश क्या है? इसमें क्या पाया जाता है?
उत्तर:
परागकोश (Anther) पुंकेसर का शीर्ष भाग है, जहाँ परागकण बनते और संग्रहित होते हैं।
इसमें क्या होता है?
-
परागकण (Pollen grains)
-
ये नर युग्मक रखते हैं।
कार्य:
-
ये फूलों के परागण में सहायता करते हैं।
-
नए पौधों के जनन के लिए नर युग्मक प्रदान करते हैं।
⭐ Q19. मादा युग्मक क्या है? इसके गुण लिखिए।
उत्तर:
मादा युग्मक वह कोशिका है जिसमें भोजन संचित रहता है और जो निषेचन में नर युग्मक के साथ मिलकर जाइगोट बनाती है।
गुण:
-
इसे अंडाणु (Ovum) कहते हैं।
-
यह गतिहीन होती है।
-
भोजन का भंडार होता है।
-
आकार में शुक्राणु से बड़ा होता है।
⭐ Q20. एड्स रोग का मुख्य कारण क्या है? इसके फैलने के तरीके लिखिए।
उत्तर:
एड्स का मुख्य कारण HIV वायरस है।
कैसे फैलता है?
-
असुरक्षित यौन संबंध
-
संक्रमित खून चढ़ाने से
-
HIV संक्रमित सुई या ब्लेड से
-
संक्रमित माँ से बच्चे में
एड्स क्या करता है?
-
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट कर देता है।
-
व्यक्ति छोटी बीमारी से भी मर सकता है।
⭐ Q21. पंखुड़ियों का रंग अधिकतर पीला क्यों होता है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
फूल की पंखुड़ियों में विशेष प्रकार के रंगद्रव्य (Pigments) पाए जाते हैं जिन्हें कैरोटिनॉइड कहते हैं। यही पंखुड़ियों को अधिकतर पीला, नारंगी या लाल रंग देते हैं।
पीला रंग क्यों महत्वपूर्ण है?
-
परागणकर्ताओं को आकर्षित करता है
— मधुमक्खियाँ, तितलियाँ पंखुड़ियों के चमकीले रंग देखकर फूलों पर आती हैं। -
परागण में सहायता
— इनकी उपस्थिति से परागकण एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचते हैं। -
फूल की पहचान
— चमकीले रंग से फूल दूर से भी दिखाई देता है।
👉 इसलिए अधिकतर पंखुड़ियों का रंग पीला या चमकीला होता है ताकि जनन प्रक्रिया सफल हो सके।
⭐ Q22. फूल के कौन से भाग से फल बनता है? प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
फल अंडाशय (Ovary) से बनता है।
प्रक्रिया (Fruit Formation):
1. निषेचन
-
परागकण अंडाशय में पहुँचकर अंडाणु से मिलते हैं।
-
नर और मादा युग्मक का संलयन होता है।
2. जाइगोट बनना
-
निषेचन के बाद जाइगोट बनता है जो भ्रूण बनाता है।
3. अंडाशय में परिवर्तन
-
अंडाशय की दीवार मोटी होकर फल की बाहरी परत बनाती है।
-
अंडाशय के अंदर मौजूद अंडाणु बीज में बदल जाते हैं।
👉 इस तरह फूल के अंडाशय से फल बनता है।
⭐ Q23. प्रांकुर (Plumule) क्या है? इसका कार्य समझाइए।
उत्तर:
बीज के अंदर मौजूद भ्रूण दो मुख्य भागों में बँटा होता है:
-
प्रांकुर (Plumule)
-
मूलांकुर (Radicle)
प्रांकुर क्या करता है?
-
प्रांकुर वह भाग है जिससे तना, पत्तियाँ और वनस्पति का ऊपरी भाग बनता है।
-
यह प्रकाश की ओर बढ़ता है और पौधे का हरा भाग बनाता है।
👉 इसे 'भ्रूण तना' भी कहा जाता है।
⭐ Q24. एककोशीय जीवों में जनन की कौन-कौन सी विधियाँ पाई जाती हैं? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
एककोशीय जीव जैसे—अमीबा, पैरामीशियम, यीस्ट आदि में अलैंगिक जनन होता है। मुख्य विधियाँ:
1. द्विखंडन (Binary Fission)
एक कोशिका दो बराबर भागों में विभाजित होकर दो जीव बनाती है।
उदाहरण: अमीबा।
2. बहु-विखंडन (Multiple Fission)
एक कोशिका कई भागों में विभाजित होकर अनेक नए जीव बनाती है।
उदाहरण: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
3. मुकुलन (Budding)
जनक कोशिका पर कली निकलती है और नया जीव बनता है।
उदाहरण: यीस्ट।
4. बीजाणुजनन (Spore Formation)
बीजाणु अनुकूल परिस्थिति में नए जीव बनाते हैं।
उदाहरण: फफूंद।
👉 इन सभी विधियों में नर और मादा जननांग की आवश्यकता नहीं होती।
⭐ Q25. लैंगिक जनन के लिए क्या आवश्यक है? कारण सहित समझाइए।
उत्तर:
लैंगिक जनन में दो प्रकार के युग्मक (Gametes) बनते और मिलते हैं।
आवश्यकताएँ:
1. नर जननांग (Male Reproductive Organ)
-
यह शुक्राणु (Sperms) बनाता है।
2. मादा जननांग (Female Reproductive Organ)
-
यह अंडाणु (Ovum) बनाता है।
3. नर और मादा युग्मकों का संलयन
-
इन्हें मिलाने की प्रक्रिया निषेचन कहलाती है।
-
इससे जाइगोट बनता है जो आगे भ्रूण बनाता है।
क्यों आवश्यक है?
-
नई संतान में दोनों माता-पिता के गुण आते हैं।
-
विविधता (Variation) पैदा होती है।
-
पर्यावरण के अनुसार जीव आसानी से अनुकूलित हो पाता है।
⭐ Q26. पुंकेसर क्या है? इसके भाग और कार्य बताइए।
उत्तर:
पुंकेसर फूल का नर जननांग है।
इसके दो मुख्य भाग होते हैं:
1. परागकोश (Anther)
-
यहाँ परागकण बनते हैं।
-
परागकण में नर युग्मक होते हैं।
2. पुंकेसर डंडी (Filament)
-
यह परागकोश को सहारा देता है।
कार्य:
-
नर युग्मक बनाना।
-
परागण के लिए परागकण उपलब्ध कराना।
-
निषेचन की प्रक्रिया में सहायक होना।
⭐ Q27. पुरुषों में यौवनारंभ के लक्षण क्या-क्या होते हैं? विस्तृत में लिखिए।
उत्तर:
यौवनारंभ वह अवस्था है जब लड़कों में शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन शुरू होते हैं।
मुख्य लक्षण:
1. दाढ़ी-मूँछ का उगना
चेहरे पर बाल आने लगते हैं।
2. कंठ का फूटना
-
आवाज भारी हो जाती है।
-
गला मोटा दिखने लगता है।
3. मांसपेशियाँ विकसित होना
-
शरीर अधिक मजबूत दिखने लगता है।
-
कंधे चौड़े हो जाते हैं।
4. वृषणों का विकास और शुक्राणुओं का निर्माण
-
जनन क्षमता विकसित होती है।
5. शरीर पर बालों की वृद्धि
-
बगल में और शरीर पर बाल बढ़ते हैं।
यौवनारंभ लड़कों में सामान्यतः 12–16 वर्ष के बीच होता है।
⭐ Q28. स्त्रियों में यौवनारंभ के लक्षण क्या हैं? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
लड़कियों में यौवनारंभ के दौरान निम्न परिवर्तन दिखाई देते हैं:
1. स्तनों का विकास
-
स्तन बड़े और पूर्ण विकसित होने लगते हैं।
2. कूल्हों का चौड़ा होना
-
शरीर का आकार बदलने लगता है।
3. मासिक धर्म का प्रारंभ (Menstruation)
-
हर महीने अंडाणु बनने लगता है और रजोधर्म शुरू होता है।
4. जननांगों का विकास
-
अंडाशय और गर्भाशय पूर्ण विकसित होते हैं।
5. बगल और जननांगों पर बाल उगना
6. शरीर में हार्मोन का बढ़ना
इन सभी परिवर्तनों से लड़की जैविक रूप से प्रजनन के लिए सक्षम होती है।
⭐ Q29. मनुष्यों में नर जनन तंत्र के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं? कार्य सहित लिखिए।
उत्तर:
मनुष्यों में नर जनन तंत्र में निम्न भाग होते हैं:
1. वृषण (Testis)
-
दो होते हैं।
-
शुक्राणु बनाते हैं।
-
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करते हैं।
2. अधिवृषण (Epididymis)
-
शुक्राणुओं को संग्रहित करने का स्थान।
3. शुक्रवाहिका (Vas Deferens)
-
शुक्राणुओं को ले जाने का मार्ग।
4. मूत्रमार्ग (Urethra)
-
वीर्य बाहर आने का मार्ग।
5. लिंग (Penis)
-
संभोग और वीर्य निष्कासन का अंग।
👉 ये सभी मिलकर पुरुष में जनन प्रक्रिया को संभव बनाते हैं।
⭐ Q30. शुक्राणुओं का मोचन कहाँ होता है? इसकी प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
शुक्राणुओं का मोचन शुक्रवाहिका (Vas Deferens) में होता है।
प्रक्रिया:
-
शुक्राणु वृषण में बनते हैं।
-
अधिवृषण में संग्रहीत होते हैं।
-
आवश्यकता पड़ने पर शुक्रवाहिका में आते हैं।
-
यौन उत्तेजना के समय शुक्रवाहिका उन्हें मूत्रमार्ग की ओर भेजती है।
-
वीर्य के रूप में शरीर से बाहर निकलते हैं।
⭐ Q31. स्त्रियों में अंडाशय की संख्या कितनी होती है? उनके कार्य समझाइए।
उत्तर:
मानव स्त्री के शरीर में दो अंडाशय (Ovaries) होते हैं।
अंडाशय के मुख्य कार्य:
1. अंडाणुओं का निर्माण
-
हर अंडाशय में हजारों अंडाणु (ova) होते हैं।
-
हर माह एक अंडाणु परिपक्व होकर फैलोपियन नली में पहुँचता है।
-
यह प्रक्रिया मासिक चक्र का हिस्सा है।
2. स्त्री हार्मोन का निर्माण
अंडाशय दो मुख्य हार्मोन बनाते हैं:
-
एस्ट्रोजेन (Estrogen)
-
प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)
इन हार्मोनों के कार्य:
-
स्त्रियों के द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित करना
-
मासिक चक्र को नियंत्रित करना
-
गर्भावस्था को बनाए रखना
3. प्रजनन में सहायक
-
अंडाशय से निकला अंडाणु शुक्राणु के साथ मिलकर जाइगोट बनाता है।
👉 इस प्रकार दोनों अंडाशय स्त्रियों की जनन प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
⭐ Q32. निषेचन के फलस्वरूप क्या बनता है? इसकी प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
निषेचन के फलस्वरूप जाइगोट (Zygote) बनता है।
🔹 निषेचन की प्रक्रिया (Steps):
1. अंडाणु का निर्माण
-
अंडाशय एक परिपक्व अंडाणु छोड़ता है।
2. शुक्राणु का प्रवेश
-
पुरुष के शरीर से शुक्राणु मादा के जनन तंत्र में प्रवेश करते हैं।
3. अंडाणु और शुक्राणु का मिलन
-
यह मिलन फैलोपियन नली में होता है।
4. युग्मकों का संलयन
-
नर युग्मक (Sperm) + मादा युग्मक (Ovum)
= जाइगोट (Fertilized egg)
🔹 जाइगोट का महत्व
-
यही भ्रूण विकसित करता है।
-
बाद में शिशु का निर्माण इसी से होता है।
⭐ Q33. वृषण में बने शुक्राणु कहाँ संचित होते हैं? इसका कार्य समझाइए।
उत्तर:
वृषण में बने शुक्राणु अधिवृषण (Epididymis) में संचित होते हैं।
अधिवृषण के कार्य:
1. शुक्राणुओं का भंडारण स्थान
-
यहाँ शुक्राणु कुछ समय तक सुरक्षित रखे जाते हैं।
2. परिपक्वता प्रदान करना
-
अधिवृषण में ही शुक्राणु पूरी तरह परिपक्व (Mature) होते हैं।
-
यहीं वे चलने की क्षमता प्राप्त करते हैं।
3. शुक्रवाहिका की ओर भेजना
-
आवश्यकता पड़ने पर शुक्राणुओं को शुक्रवाहिका में भेजा जाता है।
👉 अधिवृषण पुरुष प्रजनन तंत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।
⭐ Q34. वे परिवर्तन जो जीवों के नियंत्रण से बाहर होते हैं, क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
वे परिवर्तन जो जीवों के अपने नियंत्रण में नहीं होते, उन्हें परिवर्तन (Changes) या अप्रभावी परिवर्तन कहा जाता है।
उदाहरण:
-
उम्र बढ़ना
-
यौवनारंभ
-
ऊँचाई बढ़ना
-
हार्मोन में बदलाव
इन परिवर्तनों पर जीव का नियंत्रण नहीं होता।
⭐ Q35. एकलिंगी पुष्प क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जिस फूल में केवल एक ही प्रकार का जनन अंग (या तो पुंकेसर या स्त्रीकेसर) पाया जाता है, उसे एकलिंगी पुष्प (Unisexual flower) कहते हैं।
🔹 विशेषताएँ:
-
एक ही फूल में केवल नर या केवल मादा अंग होता है।
-
स्वपरागण नहीं कर सकते।
-
पर-परागण अधिक होता है।
🔹 उदाहरण:
-
पपीता
-
खजूर
-
तरबूज
👉 पपीता सबसे प्रमुख एकलिंगी पौधा है।
⭐ Q36. मानव जनन अंग किस आयु में परिपक्व एवं क्रियाशील होता है? कारण सहित समझाइए।
उत्तर:
मानव जनन अंग लगभग 12 वर्ष की आयु में परिपक्व और क्रियाशील होने लगते हैं।
🔹 क्यों होता है ऐसा?
क्योंकि इसी आयु में:
1. हार्मोन का स्तर बढ़ता है
-
लड़कों में टेस्टोस्टेरोन
-
लड़कियों में एस्ट्रोजन
2. यौवनारंभ (Puberty) शुरू होता है
-
शरीर में शारीरिक परिवर्तन आने लगते हैं।
3. जननांग विकसित होते हैं
-
लड़कों में शुक्राणु बनने लगते हैं।
-
लड़कियों में मासिक चक्र शुरू होता है।
👉 इसी उम्र से शारीरिक रूप से जनन क्षमता विकसित होती है।
⭐ Q37. शुक्राणु कहाँ बनते हैं? इसकी प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
शुक्राणु वृषण (Testis) में बनते हैं।
🔹 शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया (Spermatogenesis):
1. वृषण में नलिकाएँ (Seminiferous tubules) होती हैं।
यहीं से शुक्राणु बनना शुरू होते हैं।
2. निर्माण की शुरुआत किशोरावस्था (12–14 वर्ष) में होती है।
3. शुक्राणु बनने में कई चरण होते हैं:
-
कोशिकाओं का बढ़ना
-
विभाजन
-
परिवर्तन
4. अधिवृषण में पहुँचकर परिपक्व होते हैं।
👉 यही शुक्राणु जनन प्रक्रिया में नर युग्मक की भूमिका निभाते हैं।
⭐ Q38. लिंग गुणसूत्र का पूर्ण जोड़ा किसमें पाया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
लिंग गुणसूत्र का पूर्ण जोड़ा पुरुष और स्त्री दोनों में पाया जाता है।
🔹 मानव गुणसूत्र संख्या:
-
कुल गुणसूत्र = 46 (23 जोड़े)
🔹 लिंग गुणसूत्र:
स्त्री: XX
पुरुष: XY
दोनों में एक-एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र होता है।
⭐ Q39. हाइड्रा में कौन-सी प्रजनन विधि पाई जाती है? विस्तृत विवरण लिखिए।
उत्तर:
हाइड्रा में प्रमुख रूप से मुकुलन (Budding) द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
🔹 प्रक्रिया:
1. हाइड्रा के शरीर पर छोटी कली निकलती है।
-
यह कली शरीर की बाहर की त्वचा से निकलती है।
2. कली में तंतु (Tentacles) बनते हैं।
3. कली धीरे-धीरे विकसित होकर छोटा हाइड्रा बन जाती है।
4. नया हाइड्रा अलग होकर स्वतंत्र रूप से रहने लगता है।
👉 यह प्रक्रिया तेजी से होती है, इसलिए हाइड्रा के समूह जल्दी बढ़ते हैं।
⭐ Q40. फूल का कौन-सा भाग परागकण बनाता है? परागकण का महत्व लिखिए।
उत्तर:
फूल का वह भाग जहाँ परागकण बनते हैं, उसे पुंकेसर (Stamen) कहते हैं।
पुंकेसर का ऊपरी भाग परागकोश (Anther) परागकण बनाता है।
🔹 परागकण का महत्व:
1. परागकण में नर युग्मक होते हैं
-
यही निषेचन के लिए आवश्यक है।
2. परागण में सहायक
-
एक फूल से दूसरे फूल तक जाते हैं।
3. बीज बनने में भूमिका
-
अंडाणु से मिलकर नई संतान बनाते हैं।
⭐ Q41. गन्ना, गुलाब एवं अंगूर की खेती में किस जनन विधि का उपयोग किया जाता है? इसकी प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
गन्ना, गुलाब और अंगूर की खेती में कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) विधि का उपयोग किया जाता है।
🔹 कायिक प्रवर्धन क्या है?
यह एक अलैंगिक जनन विधि है जिसमें पौधे के तने, जड़ या पत्ती से नया पौधा बनाया जाता है।
🔹 इन पौधों में कैसे होता है?
1. गन्ना
-
गन्ने के तने में कई गाँठें (Nodes) होती हैं।
-
तने को टुकड़ों में काटकर लगाया जाता है।
-
गाँठ से जड़ें और नई शाखाएँ निकलती हैं।
-
नया गन्ना-पौधा तैयार हो जाता है।
2. गुलाब
-
गुलाब की शाखा का एक हिस्सा काटकर मिट्टी में लगाया जाता है।
-
इसकी कलियाँ नई जड़ें बनाती हैं।
-
कुछ दिनों बाद नया पौधा विकसित हो जाता है।
3. अंगूर
-
अंगूर की शाखाओं को कटिंग द्वारा लगाया जाता है।
-
इन कटिंग में मौजूद कलियाँ नई बेल उत्पन्न करती हैं।
🔹 लाभ:
-
पौधे जल्दी बढ़ते हैं।
-
फसल की गुणवत्ता अच्छी रहती है।
-
बीज की आवश्यकता नहीं होती।
⭐ Q42. मादा जनन तंत्र में दोनों अंडवाहिकाएँ मिलकर कौन-सी संरचना बनाती हैं? उसका कार्य लिखिए।
उत्तर:
मादा जनन तंत्र में दोनों अंडवाहिकाएँ (Fallopian Tubes) मिलकर गर्भाशय (Uterus) का निर्माण करती हैं।
🔹 गर्भाशय के कार्य:
1. भ्रूण का विकास स्थल
-
निषेचन के बाद भ्रूण गर्भाशय में चिपकता है।
-
गर्भावस्था इसी में होती है।
2. सुरक्षा
-
गर्भाशय भ्रूण को बाहरी चोट से बचाता है।
3. पोषण देना
-
भ्रूण को नाल (Placenta) के माध्यम से पोषण दिया जाता है।
4. प्रसव स्थल
-
प्रसव के समय बच्चा गर्भाशय से ही बाहर आता है।
👉 इसलिए गर्भाशय स्त्री जनन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।
⭐ Q43. भ्रूण को पोषण कहाँ से मिलता है? पूरा विवरण लिखिए।
उत्तर:
भ्रूण को पोषण माँ के रक्त (Mother’s blood) से मिलता है।
यह पोषण कैसे मिलता है?
1. नाल (Placenta) का निर्माण
-
गर्भाशय की दीवार और भ्रूण दोनों मिलकर एक विशेष ऊतक बनाते हैं जिसे नाल कहते हैं।
2. नाल में रक्त वाहिकाएँ होती हैं
-
माँ का रक्त पोषक तत्व लाता है।
-
भ्रूण का रक्त इन पोषक तत्वों को ग्रहण करता है।
3. क्या-क्या मिलता है?
-
ऑक्सीजन
-
ग्लूकोज
-
अमीनो अम्ल
-
पानी
-
विटामिन
4. अपशिष्ट पदार्थ बाहर भेजना
-
भ्रूण के अपशिष्ट (Carbon dioxide आदि) भी नाल के माध्यम से माँ के रक्त में पहुँचते हैं।
👉 इस प्रकार भ्रूण का संपूर्ण विकास माँ के रक्त से प्राप्त पोषण पर निर्भर करता है।
⭐ Q44. मानव मादा में गर्भकाल की अवधि कितनी होती है? विस्तृत में समझाइए।
उत्तर:
मानव मादा में गर्भकाल की अवधि लगभग 9 माह (280 दिन) होती है।
🔹 गर्भकाल का क्या अर्थ है?
निषेचन से लेकर शिशु के जन्म तक की अवधि को गर्भकाल कहते हैं।
🔹 इस दौरान क्या होता है?
1. पहले तीन माह – भ्रूण का निर्माण
-
हृदय, मस्तिष्क, आँखें आदि अंग बनते हैं।
2. चौथे से छठे माह – वृद्धि
-
भ्रूण का आकार बढ़ने लगता है।
-
हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
-
बच्चा हलचल करने लगता है।
3. सातवें से नौवें माह – पूर्ण विकास
-
फेफड़े विकसित होते हैं।
-
शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है।
-
बच्चा जन्म के लिए तैयार हो जाता है।
👉 9 माह पूर्ण होने पर प्रसव सामान्य रूप से होता है।
⭐ Q45. रजोधर्म (Menstruation) क्या है? इसके समय की अवधि बताइए।
उत्तर:
रजोधर्म एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें स्त्री के शरीर से रक्त और ऊतक बाहर निकलते हैं। इसे मासिक धर्म कहते हैं।
🔹 क्यों होता है?
-
गर्भाशय की दीवार हर महीने मोटी होती है ताकि भ्रूण ठहर सके।
-
यदि निषेचन न हो तो यह दीवार टूटकर रक्त के रूप में बाहर निकल जाती है।
🔹 अवधि:
-
यह सामान्यतः 3 से 9 दिन तक चलता है।
🔹 महत्व:
-
यह दर्शाता है कि मादा जनन तंत्र स्वस्थ है।
-
यह जनन चक्र का आवश्यक हिस्सा है।
⭐ Q46. निषेचन के बाद युग्मनज (Zygote) क्या बनाता है? प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
निषेचन के बाद बनी कोशिका युग्मनज (Zygote) कहलाती है।
युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनाता है।
🔹 प्रक्रिया:
1. युग्मनज का विभाजन
-
जाइगोट लगातार कई बार विभाजित होता है।
2. कोशिकाओं की गेंद बनती है
-
इसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं।
3. गर्भाशय में चिपकना
-
ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की दीवार में चिपकता है।
-
यही गर्भावस्था की शुरुआत है।
4. भ्रूण का निर्माण
-
विभिन्न कोशिकाएँ अलग-अलग अंग बनाती हैं।
-
यही भ्रूण धीरे-धीरे शिशु बनता है।
👉 निषेचन के बाद बनने वाला भ्रूण ही नवजात शिशु के रूप में विकसित होता है।
⭐ Q47. जनन (Reproduction) क्या है? इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
जनन वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करता है।
🔹 जनन के महत्व:
1. प्रजाति का संरक्षण
-
जीवों की प्रजाति नष्ट नहीं होती।
2. पीढ़ियों का निरंतर चलना
-
नई संतानें बनती रहती हैं।
3. विविधता उत्पन्न करना
-
लैंगिक जनन से नई गुणों वाले जीव बनते हैं।
4. पर्यावरणीय परिवर्तन के अनुकूल
-
विविधता जीवों को बदलते वातावरण में जीवित रहने में मदद करती है।
👉 बिना जनन के कोई भी प्रजाति समाप्त हो जाए।
⭐ Q48. जनन कितने प्रकार का होता है? दोनों का अंतर लिखिए।
उत्तर:
जनन दो प्रकार का होता है:
1. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
2. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
🔹 अंतर:
| लैंगिक जनन | अलैंगिक जनन |
|---|---|
| नर और मादा दोनों युग्मक बनते हैं | केवल एक माता-पिता पर्याप्त |
| निषेचन होता है | निषेचन नहीं होता |
| नई संतान में विविधता होती है | संतान बिल्कुल माता-पिता जैसी होती है |
| प्रक्रिया धीमी | प्रक्रिया तेज |
| उदाहरण: मनुष्य, फूलदार पौधे | अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा |
⭐ Q49. अलैंगिक जनन की कौन-कौन सी विधियाँ होती हैं? विस्तृत में लिखिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन की मुख्य विधियाँ निम्न हैं:
1. विखंडन (Fission)
-
अमीबा में द्विखंडन
-
प्लाज्मोडियम में बहु-विखंडन
2. मुकुलन (Budding)
-
यीस्ट और हाइड्रा में।
3. बीजाणुजनन (Spore Formation)
-
फफूंद, काई आदि में।
4. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
-
तना, जड़ या पत्तियों से नया पौधा तैयार करना।
-
उदाहरण: आलू, अदरक, गन्ना, ब्रायोफिलम।
👉 इन सभी विधियों में माता-पिता केवल एक होता है।
⭐ Q50. मुकुलन (Budding) में कली कैसे बनती है? विस्तृत में समझाइए।
उत्तर:
मुकुलन एक अलैंगिक जनन विधि है जिसमें जनक जीव पर कली (Bud) निकलती है और नया जीव बनाती है।
🔹 प्रक्रिया:
1. जनक के शरीर पर उभार बनता है
-
इसे कली कहते हैं।
2. कली में वृद्धि होती है
-
यह बड़ी होकर अंगों का निर्माण करती है।
3. पोषक तत्व कली में पहुँचते हैं
-
जनक जीव कली को पोषण देता है।
4. कली अलग हो जाती है
-
पूरी तरह विकसित होने पर कली अलग होकर नया जीव बन जाती है।
🔹 उदाहरण:
-
यीस्ट (एककोशीय जीव)
-
हाइड्रा (बहुकोशीय जीव)
⭐ Q51. परागकोश में क्या पाया जाता है? परागकोश का महत्व समझाइए।
उत्तर:
परागकोश (Anther) फूल के पुंकेसर का ऊपरी भाग होता है।
इसमें परागकण (Pollen grains) पाए जाते हैं।
🔹 परागकोश में क्या होता है?
-
परागकण
-
परागकण के अंदर नर युग्मक होते हैं।
🔹 परागकोश का महत्व:
1. परागकणों का निर्माण
-
परागकोश वह स्थान है जहाँ नर जनन कोशिकाएँ बनती हैं।
2. परागण में सहायता
-
परागकण हवा, कीट आदि द्वारा स्त्रीकेसर पर पहुँचते हैं।
3. निषेचन के लिए आवश्यक
-
बिना परागकण के अंडाणुओं का निषेचन संभव नहीं।
👉 इस प्रकार परागकोश पौधों की जनन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
⭐ Q52. स्त्रीकेसर के आधारीय भाग को क्या कहते हैं? इसका कार्य लिखिए।
उत्तर:
स्त्रीकेसर (Carpel) के आधारीय भाग को अंडाशय (Ovary) कहते हैं।
🔹 अंडाशय के कार्य:
1. अंडाणु का निर्माण
-
अंडाशय के अंदर छोटे-छोटे बीजांड (Ovules) होते हैं।
-
प्रत्येक बीजांड में एक अंडाणु होता है।
2. निषेचन का स्थान
-
परागण के बाद परागनली द्वारा बना नर युग्मक अंडाशय तक पहुँचता है।
-
यहाँ अंडाणु से मिलकर निषेचन होता है।
3. फल का निर्माण
-
निषेचन के बाद अंडाशय फल में बदल जाता है।
4. बीज संरक्षण
-
अंडाशय बीजांडों को सुरक्षित रखता है।
👉 अंडाशय के बिना पौधों में फल और बीज नहीं बन सकते।
⭐ Q53. पुंकेसर के अग्रभाग को क्या कहते हैं? उसका कार्य लिखिए।
उत्तर:
पुंकेसर के अग्रभाग को परागकोश (Anther) कहते हैं।
🔹 परागकोश का कार्य:
1. परागकण बनाना
-
परागकण नर जनन कोशिकाएँ हैं।
-
ये पौधों के लैंगिक जनन के लिए आवश्यक होते हैं।
2. परागकणों को संग्रहीत करना
-
जब तक परागण नहीं होता, परागकोश इन्हें सुरक्षित रखता है।
3. परागण में सहायक
-
परागकोश फटकर परागकण बाहर छोड़ता है।
👉 परागकोश के बिना पौधों में नर युग्मक नहीं बन सकते।
⭐ Q54. निषेचन की क्रिया मुख्यतः किस जीव में होती है? विस्तृत में लिखिए।
उत्तर:
निषेचन की क्रिया मुख्यतः पुष्पी पादपों और जंतुओं में होती है।
🔹 (A) पौधों में निषेचन
-
परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
-
परागनली अंडाशय तक बढ़ती है।
-
नर युग्मक अंडाणु से मिलकर जाइगोट बनाता है।
-
यही आगे फल व बीज बनते हैं।
🔹 (B) जानवरों में निषेचन
-
नर और मादा दोनों युग्मक बनाते हैं।
-
शुक्राणु मादा के शरीर में प्रवेश करता है।
-
फैलोपियन नलिका में अंडाणु और शुक्राणु मिलते हैं।
-
परिणामस्वरूप युग्मनज (जाइगोट) बनता है।
👉 इसलिए निषेचन लैंगिक जनन में सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
⭐ Q55. निषेचन के बाद अंडाशय किसमें बदल जाता है? उसकी प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
निषेचन के बाद अंडाशय फल (Fruit) में बदल जाता है।
🔹 प्रक्रिया:
1. निषेचन
-
परागनली से आया नर युग्मक अंडाणु से मिलता है।
2. जाइगोट बनना
-
निषेचन के बाद अंडाणु → बीज बन जाता है।
3. अंडाशय में परिवर्तन
-
अंडाशय की दीवार मोटी हो जाती है।
-
यह विकसित होकर फल बनाती है।
4. पूरे फूल में परिवर्तन
-
पंखुड़ियाँ मुरझा जाती हैं।
-
केवल अंडाशय व बीजांड टिकते हैं।
👉 इस प्रकार फल निषेचित अंडाशय का परिपक्व रूप है।
⭐ Q56. बीजांड की दीवारें मोटी होकर क्या बनाती हैं? उसकी भूमिका लिखिए।
उत्तर:
बीजांड की दीवारें मोटी होकर बीजावरण (Seed coat) बनाती हैं।
🔹 बीजावरण के कार्य:
1. सुरक्षा
-
बीज के अंदर के भ्रूण की रक्षा करता है।
2. पानी और अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरण की अनुमति
-
बीजावरण केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही पानी अंदर जाने देता है।
3. बीज को लंबे समय तक जीवित रखना
-
यह बीज को सूखने और खराब होने से बचाता है।
👉 बीजावरण के कारण ही बीज सुरक्षित रूप से अंकुरण तक जीवित रहता है।
⭐ Q57. कौन-सा अंग केवल पुरुष जननांग में पाया जाता है? कारण सहित लिखिए।
उत्तर:
शुक्रवाहिका (Vas Deferens) केवल पुरुष जनन अंग में पाया जाता है।
🔹 शुक्रवाहिका क्या करती है?
-
वृषण में बने शुक्राणुओं को अधिवृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है।
-
यह शुक्राणुओं को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।
🔹 मादा में क्यों नहीं होती?
-
मादा के जनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय और योनि होते हैं।
-
मादा शरीर शुक्राणु नहीं बनाता, इसलिए शुक्राणु ले जाने वाली नली की आवश्यकता नहीं।
⭐ Q58. नर और मादा युग्मक के संलयन से क्या बनता है? प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर:
नर (Sperm) और मादा (Ovum) युग्मक के मिलने से जाइगोट (Zygote) बनता है।
🔹 प्रक्रिया:
1. अंडाणु का निर्माण
-
अंडाशय से बनता है।
2. शुक्राणु का प्रवेश
-
शुक्राणु मादा के शरीर में प्रवेश करते हैं।
3. फैलोपियन नली में मिलन
-
एक शुक्राणु अंडाणु तक पहुँचता है।
4. संलयन (Fusion)
-
दोनों युग्मक मिलकर एक नई कोशिका बनाते हैं —
जाइगोट
5. भ्रूण बनना
-
जाइगोट लगातार विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
👉 यही भ्रूण आगे चलकर शिशु बनता है।
⭐ Q59. मासिक चक्र में परिपक्व अंडाणु किस दिन अंडाशय से बाहर आता है? विस्तृत में समझाइए।
उत्तर:
मासिक चक्र के लगभग 14वें दिन परिपक्व अंडाणु अंडाशय से बाहर निकलता है।
इसे अंडोत्सर्जन (Ovulation) कहते हैं।
🔹 अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया:
1. चक्र का पहला दिन – रजोधर्म
-
गर्भाशय की पुरानी परत बाहर निकलती है।
2. 1–13 दिन – परत का पुनर्निर्माण
-
अंडाशय में अंडाणु बनता है।
-
गर्भाशय की दीवार मोटी होती जाती है।
3. 14वें दिन – अंडोत्सर्जन
-
परिपक्व अंडाणु अंडाशय से मुक्त होकर फैलोपियन नली में चला जाता है।
-
यही समय गर्भधारण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
👉 यह प्रक्रिया हर महीने दोहराई जाती है।
⭐ Q60. निम्न में से कौन-सा रोग लैंगिक संचारित नहीं है? कारण सहित लिखिए।
उत्तर:
टाइफॉयड लैंगिक संचारित रोग नहीं है।
🔹 क्यों नहीं?
-
टाइफॉयड Salmonella Typhi बैक्टीरिया के कारण होता है।
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यह दूषित पानी और भोजन से फैलता है।
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यौन संपर्क से इसका प्रसार नहीं होता।
🔹 लैंगिक संचारित रोगों के उदाहरण:
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एड्स (AIDS)
-
गोनोरिया
-
सिफलिस
👉 इसलिए टाइफॉयड एक सामान्य संक्रामक रोग है, न कि लैंगिक संचारित।
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