अध्याय–3 : स्वास्थ्य एवं स्वच्छता
स्वास्थ्य क्या है?
स्वास्थ्य वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हो तथा किसी भी प्रकार के रोग से मुक्त हो।
अच्छे स्वास्थ्य का महत्व
स्वस्थ व्यक्ति सभी कार्य अच्छी तरह कर सकता है।
पढ़ाई और खेल में अच्छा प्रदर्शन करता है।
शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति होती है।
मानसिक तनाव कम रहता है।
जीवन सुखी एवं सफल बनता है।
स्वस्थ शरीर की आवश्यक शर्तें
1. संतुलित एवं पौष्टिक आहार
संतुलित आहार वह भोजन है जिसमें शरीर की आवश्यकता के अनुसार सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में उपस्थित हों।
पोषक तत्व
कार्बोहाइड्रेट – ऊर्जा प्रदान करता है।
प्रोटीन – शरीर की वृद्धि एवं टूट-फूट की मरम्मत करता है।
वसा – ऊर्जा का भंडार है।
विटामिन – रोगों से बचाते हैं।
खनिज लवण – हड्डियों एवं दाँतों को मजबूत बनाते हैं।
जल – शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है।
रेशेदार पदार्थ – पाचन क्रिया को ठीक रखते हैं।
संतुलित आहार के स्रोत
अनाज
दालें
दूध एवं दुग्ध पदार्थ
फल
हरी पत्तेदार सब्जियाँ
अंडा, मछली, मांस (जहाँ उपयुक्त हो)
भोजन करने की अच्छी आदतें
भोजन समय पर करें।
भोजन करने से पहले हाथ धोएँ।
भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएँ।
ताजा और गर्म भोजन करें।
अत्यधिक तला-भुना भोजन न करें।
फास्ट फूड एवं जंक फूड से बचें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ।
व्यायाम
व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा साधन है।
व्यायाम के लाभ
शरीर मजबूत बनता है।
रक्त संचार अच्छा रहता है।
पाचन शक्ति बढ़ती है।
मोटापा कम होता है।
हृदय एवं फेफड़े स्वस्थ रहते हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
मानसिक तनाव कम होता है।
पेयजल का महत्व
शरीर में जल की कमी नहीं होने देता।
भोजन पचाने में सहायता करता है।
शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है।
विषैले पदार्थ बाहर निकालता है।
शुद्ध पेयजल की विशेषताएँ
रंगहीन
गंधहीन
स्वादिष्ट
रोगाणुरहित
हानिकारक रसायनों से मुक्त
व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं स्वच्छता
व्यक्तिगत स्वच्छता का अर्थ है अपने शरीर को साफ एवं स्वस्थ रखना।
व्यक्तिगत स्वच्छता के नियम
प्रतिदिन स्नान करें।
रोज़ दाँत साफ करें।
भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोएँ।
नाखून समय-समय पर काटें।
बाल साफ रखें।
साफ कपड़े पहनें।
आँख, कान और नाक की सफाई रखें।
प्रतिदिन शौच जाएँ।
पर्याप्त नींद लें।
नियमित व्यायाम करें।
आँखों की देखभाल
गंदे हाथों से आँख न छुएँ।
पर्याप्त प्रकाश में पढ़ें।
आँखों में धूल जाने पर साफ पानी से धोएँ।
तेज धूप में चश्मा पहनें।
कानों की देखभाल
कान में नुकीली वस्तु न डालें।
कान को साफ रखें।
दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
नाक की देखभाल
नाक साफ रखें।
नाक में कोई वस्तु न डालें।
छींकते समय रूमाल का प्रयोग करें।
दाँतों की देखभाल
दिन में दो बार ब्रश करें।
मीठी चीज़ें कम खाएँ।
भोजन के बाद कुल्ला करें।
दाँतों की नियमित जाँच कराएँ।
त्वचा की देखभाल
प्रतिदिन स्नान करें।
साफ कपड़े पहनें।
त्वचा को साफ एवं सूखा रखें।
पैरों की देखभाल
पैर प्रतिदिन धोएँ।
साफ मोज़े पहनें।
सही आकार के जूते पहनें।
वस्त्रों की स्वच्छता
मौसम के अनुसार कपड़े पहनें।
प्रतिदिन साफ कपड़े बदलें।
गंदे कपड़े न पहनें।
सामुदायिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता
सामुदायिक स्वास्थ्य का अर्थ है पूरे समाज को स्वस्थ एवं स्वच्छ रखना।
इसके लिए आवश्यक कार्य
साफ पेयजल की व्यवस्था।
कूड़े का सही निपटान।
नालियों की सफाई।
शौचालय का उपयोग।
पर्यावरण को स्वच्छ रखना।
प्रदूषण रोकना।
कचरे का उचित प्रबंधन
कूड़ा कूड़ेदान में डालें।
गीले और सूखे कचरे को अलग करें।
जैविक कचरे से खाद (कम्पोस्ट) बनाएँ।
प्लास्टिक का कम उपयोग करें।
प्रदूषण के प्रकार
वायु प्रदूषण
जल प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण
प्रदूषण से बचाव
अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ।
जल स्रोतों को साफ रखें।
कचरा इधर-उधर न फेंकें।
ध्वनि प्रदूषण कम करें।
संक्रामक रोग
संक्रामक रोग वे रोग हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं।
संक्रामक रोगों के प्रकार
जीवाणु द्वारा
हैजा
टाइफाइड
डिप्थीरिया
निमोनिया
विषाणु द्वारा
खसरा
चेचक
पोलियो
एड्स
प्रोटोजोआ द्वारा
मलेरिया
कालाजार
अमीबीय पेचिश
फफूंद द्वारा
दाद
खुजली
संक्रामक रोग फैलने के कारण
दूषित जल
दूषित भोजन
संक्रमित व्यक्ति
मच्छर एवं मक्खी
गंदगी
संक्रमित वस्तुओं का उपयोग
संक्रामक रोगों से बचाव
हाथों को साबुन से धोएँ।
साफ पानी पिएँ।
ताजा भोजन करें।
भोजन ढककर रखें।
घर एवं आसपास सफाई रखें।
मच्छरों से बचाव करें।
समय पर टीकाकरण कराएँ।
रोगी से उचित दूरी रखें।
टीकाकरण का महत्व
टीकाकरण से अनेक गंभीर रोगों से बचाव होता है।
मुख्य टीके
बीसीजी (टीबी)
पोलियो
डीपीटी
हेपेटाइटिस-बी
खसरा
एमएमआर
अध्याय के मुख्य बिंदु
स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण की अवस्था है।
संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।
नियमित व्यायाम एवं योग आवश्यक हैं।
शुद्ध पेयजल स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्वच्छता रोगों से बचाती है।
संक्रामक रोग रोगाणुओं द्वारा फैलते हैं।
स्वच्छता, संतुलित आहार, शुद्ध पानी तथा टीकाकरण से अधिकांश संक्रामक रोगों से बचाव किया जा सकता है।
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