कक्षा 7 विज्ञान — अध्याय 1: पादपों में पोषण

 

कक्षा 7 विज्ञान — अध्याय 1: पादपों में पोषण



1. पोषण क्या है?

परिभाषा:
जीवों द्वारा भोजन प्राप्त करने और उसका उपयोग वृद्धि, विकास, ऊर्जा प्राप्त करने तथा शरीर की मरम्मत के लिए करने की प्रक्रिया को पोषण (Nutrition) कहते हैं।

पोषण क्यों आवश्यक है?

जीवों को भोजन की आवश्यकता होती है क्योंकि भोजन—

  1. शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

  2. शरीर की वृद्धि में सहायता करता है।

  3. क्षतिग्रस्त भागों की मरम्मत करता है।

  4. शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।

  5. विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक पदार्थ प्रदान करता है।


2. पोषक पदार्थ

भोजन में पाए जाने वाले वे पदार्थ जो शरीर के लिए आवश्यक होते हैं, पोषक पदार्थ (Nutrients) कहलाते हैं।

मुख्य पोषक पदार्थ—

  • कार्बोहाइड्रेट

  • प्रोटीन

  • वसा

  • विटामिन

  • खनिज लवण

  • जल

नोट: पौधों को भी अपनी वृद्धि एवं जीवन-क्रियाओं के लिए जल, खनिज तथा अन्य आवश्यक पदार्थों की जरूरत होती है।


3. पौधों में पोषण

पौधों में पोषण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—

(1) स्वपोषी पोषण

(2) विषमपोषी पोषण


4. स्वपोषी पोषण

परिभाषा:
जिस पोषण विधि में जीव अपना भोजन स्वयं बनाता है, उसे स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition) कहते हैं।

स्वपोषी जीव:
जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहते हैं।

उदाहरण:

  • हरे पौधे

  • हरी शैवाल

अधिकांश हरे पौधे स्वपोषी होते हैं।


5. विषमपोषी पोषण

परिभाषा:
जिस पोषण विधि में जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाता और भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहता है, उसे विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition) कहते हैं।

ऐसे जीवों को विषमपोषी (Heterotrophs) कहते हैं।

उदाहरण:

  • मनुष्य

  • गाय

  • बकरी

  • शेर

  • कुत्ता

  • अनेक अन्य जीव

कुछ पौधे भी विषमपोषी होते हैं।


6. प्रकाश संश्लेषण

सबसे महत्वपूर्ण परिभाषा ⭐

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से अपना भोजन (कार्बोहाइड्रेट) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक चीजें

प्रकाश संश्लेषण के लिए मुख्य रूप से चार चीजें आवश्यक हैं—

  1. सूर्य का प्रकाश

  2. क्लोरोफिल

  3. कार्बन डाइऑक्साइड

  4. जल


7. क्लोरोफिल

परिभाषा:
पत्तियों में पाया जाने वाला हरे रंग का पदार्थ, जो सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण करने में सहायता करता है, क्लोरोफिल (Chlorophyll) कहलाता है।

मुख्य बातें

  • क्लोरोफिल पत्तियों को हरा रंग देता है।

  • यह प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण करता है।

  • प्रकाश संश्लेषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

  • क्लोरोफिल मुख्यतः पत्ती की हरी कोशिकाओं में पाया जाता है।


8. पत्तियाँ भोजन बनाने का मुख्य स्थान क्यों हैं?

पत्तियों को पौधे की खाद्य फैक्ट्री (Food Factory) कहा जाता है।

क्योंकि—

  1. पत्तियों में क्लोरोफिल होता है।

  2. पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश को प्राप्त करती हैं।

  3. पत्तियों में सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनसे कार्बन डाइऑक्साइड अंदर जाती है।

  4. जड़ों द्वारा अवशोषित जल पत्तियों तक पहुँचता है।

  5. इन सबकी सहायता से पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाती हैं।


9. रंध्र (Stomata)

परिभाषा:
पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले बहुत छोटे-छोटे छिद्रों को रंध्र (Stomata) कहते हैं।

रंध्र के कार्य

  1. कार्बन डाइऑक्साइड को पत्ती के अंदर प्रवेश कराते हैं।

  2. प्रकाश संश्लेषण में बनी ऑक्सीजन को बाहर निकलने में सहायता करते हैं।

  3. जलवाष्प के बाहर निकलने में भी इनकी भूमिका होती है।

रंध्र के चारों ओर विशेष कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें रक्षक कोशिकाएँ (Guard Cells) कहते हैं।


10. जल और खनिज पौधों तक कैसे पहुँचते हैं?

पौधे मिट्टी से—

  • जल

  • खनिज लवण

जड़ों द्वारा प्राप्त करते हैं।

जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज वाहिकाओं/नलिकाओं के माध्यम से तने से होकर पत्तियों तक पहुँचते हैं।

याद रखें:

मिट्टी → जड़ → तना → शाखाएँ → पत्तियाँ


11. कार्बन डाइऑक्साइड पौधों को कहाँ से मिलती है?

वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड पत्तियों के रंध्रों द्वारा अंदर प्रवेश करती है।

इस प्रकार—

कार्बन डाइऑक्साइड → रंध्र → पत्ती


12. प्रकाश संश्लेषण का समीकरण ⭐⭐⭐

कार्बन डाइऑक्साइड + जल
सूर्य का प्रकाश + क्लोरोफिल
→ कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन

सरल रूप में:

CO₂ + H₂O → कार्बोहाइड्रेट + O₂

यह प्रक्रिया सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में होती है।


13. प्रकाश संश्लेषण में बनने वाला भोजन

प्रकाश संश्लेषण के दौरान मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट बनता है।

पौधे द्वारा बनाया गया अतिरिक्त भोजन प्रायः स्टार्च (मंड) के रूप में संचित किया जाता है।

इसलिए:

पत्ती में स्टार्च की उपस्थिति प्रकाश संश्लेषण होने का प्रमाण है।


14. प्रकाश संश्लेषण में सूर्य का महत्व

सूर्य प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।

महत्वपूर्ण तथ्य ⭐:

सभी जीवों के लिए सूर्य ऊर्जा का प्रमुख/मुख्य स्रोत है।

यदि प्रकाश संश्लेषण न हो—

  • पौधे भोजन नहीं बना पाएँगे।

  • खाद्य पदार्थों की उपलब्धता समाप्त हो जाएगी।

  • ऑक्सीजन का निर्माण बहुत कम हो जाएगा।

  • पृथ्वी पर जीवन प्रभावित होगा।


15. प्रकाश संश्लेषण का महत्व

प्रकाश संश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  1. इससे पौधे अपना भोजन बनाते हैं।

  2. पृथ्वी के अधिकांश खाद्य पदार्थों का आधार पौधे हैं।

  3. इससे ऑक्सीजन उत्पन्न होती है।

  4. मनुष्य और अन्य जीवों को भोजन मिलता है।

  5. यह वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के संतुलन में सहायता करता है।

  6. पौधों में भोजन स्टार्च आदि के रूप में संचित होता है।


16. क्या सभी पौधे हरे होते हैं?

नहीं।

कुछ पौधों की पत्तियाँ लाल, बैंगनी, पीली या अन्य रंगों की हो सकती हैं।

लेकिन उनमें भी क्लोरोफिल मौजूद हो सकता है। अन्य रंगद्रव्य क्लोरोफिल के हरे रंग को ढक देते हैं।

उदाहरण:

रंगीन पत्तियों वाले कुछ पौधे भी प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं।


17. क्या पौधों के दूसरे भाग भी प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं?

हाँ।

कुछ पौधों में हरी तने और हरी शाखाएँ भी प्रकाश संश्लेषण कर सकती हैं।

अर्थात जहाँ क्लोरोफिल उपस्थित होता है, वहाँ प्रकाश संश्लेषण संभव हो सकता है।


18. विषमपोषी पौधे

सभी पौधे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।

कुछ पौधों में क्लोरोफिल नहीं होता या वे पर्याप्त भोजन स्वयं नहीं बना पाते। ऐसे पौधे भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर होते हैं।

इनका पोषण विषमपोषी पोषण कहलाता है।


19. विषमपोषी पौधों के प्रमुख प्रकार

पौधों में विषमपोषी पोषण के प्रमुख प्रकार—

  1. परजीवी पोषण

  2. कीटभक्षी पोषण

  3. मृतजीवी पोषण

  4. सहजीवी पोषण


20. परजीवी पौधे

परिभाषा:
जो पौधे अपना भोजन प्राप्त करने के लिए किसी दूसरे जीवित पौधे पर निर्भर रहते हैं, उन्हें परजीवी पौधे (Parasitic Plants) कहते हैं।

जिस पौधे से परजीवी पौधा भोजन प्राप्त करता है, उसे पोषी (Host) कहते हैं।

उदाहरण:

अमरबेल (Cuscuta)

अमरबेल में क्लोरोफिल नहीं होता। इसलिए यह अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकती और दूसरे पौधे से भोजन प्राप्त करती है।

याद रखें:

अमरबेल = परजीवी पौधा


21. परजीवी पौधों की विशेषताएँ

  1. ये दूसरे जीवित पौधे पर निर्भर रहते हैं।

  2. ये पोषी पौधे से भोजन प्राप्त करते हैं।

  3. इनमें प्रायः क्लोरोफिल नहीं होता।

  4. ये पोषी पौधे को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

  5. अमरबेल इसका प्रमुख उदाहरण है।


22. कीटभक्षी पौधे

परिभाषा:
जो पौधे कीटों को पकड़कर उनका पाचन करते हैं और उनसे आवश्यक पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं, उन्हें कीटभक्षी पौधे (Insectivorous Plants) कहते हैं।

उदाहरण:

  • घटपर्णी / पिचर प्लांट

  • वीनस फ्लाईट्रैप

  • सनड्यू


23. घटपर्णी (Pitcher Plant)

घटपर्णी में पत्ती का एक भाग घड़े जैसी संरचना में बदल जाता है।

इस घड़े में—

  • कीट आकर्षित होते हैं।

  • अंदर गिर जाते हैं।

  • नीचे मौजूद पाचक रस द्वारा उनका पाचन होता है।

  • पौधा उनसे आवश्यक पोषक पदार्थ प्राप्त करता है।

विशेष बात ⭐

घटपर्णी हरी होती है और प्रकाश संश्लेषण कर सकती है।
कीटों से इसे मुख्य रूप से नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।


24. कीटभक्षी पौधे कीटों को क्यों खाते हैं?

जिन स्थानों की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है, वहाँ रहने वाले कुछ पौधे नाइट्रोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए कीटों से पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं।

इसलिए कीटों को खाना भोजन बनाने के लिए नहीं बल्कि अतिरिक्त पोषक तत्व प्राप्त करने के लिए होता है।


25. मृतजीवी पोषण

परिभाषा:
जिस पोषण विधि में जीव मृत एवं सड़े-गले जैव पदार्थों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं, उसे मृतजीवी पोषण (Saprotrophic Nutrition) कहते हैं।

उदाहरण:

कवक / फफूँद (Fungi)

जैसे—

  • मशरूम

  • ब्रेड पर उगने वाली फफूँद


26. कवक अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

कवक—

  1. मृत एवं सड़े-गले पदार्थों पर उगते हैं।

  2. पाचक पदार्थ/एंजाइम छोड़ते हैं।

  3. जटिल पदार्थों को सरल एवं घुलनशील पदार्थों में बदलते हैं।

  4. फिर इन घुलनशील पदार्थों को अवशोषित कर लेते हैं।

उदाहरण:

ब्रेड पर उगने वाली फफूँद।


27. कवक के लिए नमी और गर्मी क्यों महत्वपूर्ण है?

कवक सामान्यतः नम और गर्म परिस्थितियों में तेजी से बढ़ते हैं।

इसी कारण—

  • बरसात के मौसम में फफूँद अधिक दिखाई देती है।

  • गीली ब्रेड पर जल्दी फफूँद लगती है।

  • नमी वाले स्थानों पर कवक तेजी से बढ़ सकता है।


28. कवक से होने वाली हानि

कुछ कवक—

  1. भोजन को खराब करते हैं।

  2. फसलों में रोग उत्पन्न कर सकते हैं।

  3. पौधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

  4. मनुष्यों और अन्य जीवों में कुछ रोग पैदा कर सकते हैं।

लेकिन सभी कवक हानिकारक नहीं होते।

उपयोगी कवक:

कुछ कवक खाद्य पदार्थों एवं औषधियों आदि के निर्माण में उपयोगी होते हैं।


29. सहजीवी पोषण

परिभाषा:
जब दो अलग-अलग जीव साथ रहते हैं और दोनों को इस संबंध से लाभ मिलता है, तो इसे सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship) कहते हैं।

ऐसे जीवों से संबंधित पोषण को सहजीवी पोषण कहा जाता है।


30. लाइकेन (Lichen)

लाइकेन में दो जीव साथ रहते हैं—

  1. शैवाल

  2. कवक

शैवाल का कार्य:

  • क्लोरोफिल होता है।

  • प्रकाश संश्लेषण करके भोजन बनाता है।

कवक का कार्य:

  • जल और खनिज उपलब्ध कराने में सहायता करता है।

  • रहने का स्थान देता है।

इस प्रकार दोनों को लाभ होता है।


31. लाइकेन में पोषण

शैवाल → भोजन बनाता है
कवक → जल, खनिज और रहने का स्थान उपलब्ध कराता है

इसलिए यह सहजीवी संबंध का उदाहरण है।


32. दलहनी पौधे और राइजोबियम

दलहनी पौधों की जड़ों में विशेष प्रकार की गाँठें (Root Nodules) पाई जाती हैं।

इनमें राइजोबियम (Rhizobium) नामक जीवाणु पाए जाते हैं।

उदाहरण:

  • चना

  • मटर

  • मूँग

  • मसूर

  • सेम

  • अन्य दलहनी पौधे


33. राइजोबियम का महत्व ⭐

वायुमंडल में नाइट्रोजन बहुत अधिक मात्रा में होती है, लेकिन पौधे इसे सीधे गैसीय रूप में उपयोग नहीं कर सकते।

राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे यौगिकों में बदलने में सहायता करते हैं जिन्हें पौधे उपयोग कर सकते हैं।

इसके बदले पौधा राइजोबियम को—

  • रहने का स्थान

  • भोजन

प्रदान करता है।

इसलिए यह सहजीवी संबंध है।


34. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी

पौधे मिट्टी से लगातार—

  • नाइट्रोजन

  • फॉस्फोरस

  • पोटैशियम

  • अन्य खनिज

लेते रहते हैं।

इस कारण लंबे समय तक खेती करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा कम हो सकती है।


35. मिट्टी में पोषक तत्वों की पुनःपूर्ति

परिभाषा:
मिट्टी में कम हो गए पोषक तत्वों को दोबारा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को पोषक तत्वों की पुनःपूर्ति कहा जाता है।

इसे निम्न तरीकों से किया जाता है—

(1) खाद डालकर

जैविक पदार्थों से बनी खाद मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाती है।

(2) उर्वरक डालकर

उर्वरक में आवश्यक खनिज पोषक तत्व होते हैं।

(3) दलहनी फसल उगाकर

राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता करते हैं।


36. खाद और उर्वरक

खाद (Manure)

जैविक पदार्थों से प्राप्त पदार्थ जिसे मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाने के लिए डाला जाता है।

उर्वरक (Fertilizer)

ऐसे पदार्थ जिनमें पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं और जिन्हें मिट्टी में मिलाया जाता है।

उदाहरण:

नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम युक्त उर्वरक।


37. नाइट्रोजन पौधों के लिए क्यों आवश्यक है?

नाइट्रोजन पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।

यह पौधों में—

  • प्रोटीन निर्माण

  • वृद्धि

  • विकास

के लिए आवश्यक है।

पौधे वायुमंडल की नाइट्रोजन गैस को सीधे उपयोग नहीं कर पाते। मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन यौगिकों के रूप में वे इसे प्राप्त करते हैं।


38. कीटभक्षी पौधे और नाइट्रोजन

जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है, वहाँ कुछ पौधे कीटों को पकड़कर उनसे नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।

इसलिए—

कीटभक्षी पौधे = प्रकाश संश्लेषण + कीटों से अतिरिक्त पोषक तत्व


39. प्रयोग — पत्ती में स्टार्च की जाँच

अध्याय में दिए गए प्रयोग का उद्देश्य यह पता करना है कि प्रकाश संश्लेषण के दौरान भोजन बनता है या नहीं।

आवश्यक सामग्री:

  • दो समान प्रकार के गमले वाले पौधे

  • एक को अंधकार में रखने की व्यवस्था

  • दूसरा सूर्य के प्रकाश में

  • आयोडीन विलयन

विधि:

  1. एक पौधे को लगभग 72 घंटे तक अंधकार में रखें।

  2. दूसरे पौधे को सूर्य के प्रकाश में रखें।

  3. दोनों पौधों की पत्तियाँ लें।

  4. पत्तियों पर आयोडीन परीक्षण करें।

  5. परिणाम की तुलना करें।

परिणाम:

जिस पत्ती को प्रकाश मिला उसमें स्टार्च पाया जाएगा।

निष्कर्ष:

प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।


40. आयोडीन परीक्षण

आयोडीन का उपयोग पत्ती में स्टार्च की उपस्थिति जाँचने के लिए किया जाता है।

याद रखने योग्य:

आयोडीन + स्टार्च → नीला-काला रंग

इसलिए पत्ती का भाग नीला-काला हो जाए तो वहाँ स्टार्च की उपस्थिति मानी जाती है।


41. प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश क्यों आवश्यक है?

क्योंकि पौधे सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

यह ऊर्जा कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया में उपयोग होती है।

इसलिए—

बिना प्रकाश के सामान्य हरे पौधों में प्रकाश संश्लेषण नहीं हो सकता।


42. प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन का निर्माण

प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन उत्पन्न होती है।

पौधे इसका कुछ भाग उपयोग करते हैं और शेष ऑक्सीजन वायुमंडल में छोड़ देते हैं।

महत्व:

वायुमंडल की ऑक्सीजन मनुष्य और अन्य जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है।


43. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अंतर

प्रकाश संश्लेषणश्वसन
मुख्यतः हरे पौधों में होता हैसभी जीवित कोशिकाओं में होता है
प्रकाश की आवश्यकता होती हैप्रकाश की आवश्यकता नहीं
भोजन बनता हैभोजन से ऊर्जा प्राप्त होती है
CO₂ का उपयोग होता हैO₂ का उपयोग सामान्यतः होता है
O₂ निकलती हैCO₂ बन सकती है
सूर्य की ऊर्जा का उपयोग होता हैभोजन में संचित ऊर्जा मुक्त होती है

44. पौधों में भोजन का परिवहन

पत्तियों में बना भोजन पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाया जाता है।

यह भोजन—

  • जड़

  • तना

  • फूल

  • फल

  • बीज

आदि तक पहुँचता है।

भोजन के परिवहन के लिए पौधे में विशेष वाहिकाएँ होती हैं।


45. पौधे केवल कार्बोहाइड्रेट ही नहीं बनाते

प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने कार्बोहाइड्रेट का उपयोग पौधे अन्य आवश्यक पदार्थों के निर्माण में करते हैं।

जैसे—

  • प्रोटीन

  • वसा

  • अन्य जैविक पदार्थ

प्रोटीन निर्माण के लिए नाइट्रोजन जैसे खनिजों की भी आवश्यकता होती है।


46. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ — परीक्षा के लिए ⭐⭐⭐

1. पोषण

जीव द्वारा भोजन प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया पोषण कहलाती है।

2. स्वपोषी

जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, वे स्वपोषी कहलाते हैं।

3. विषमपोषी

जो जीव भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, वे विषमपोषी कहलाते हैं।

4. प्रकाश संश्लेषण

हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में CO₂ तथा जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।

5. क्लोरोफिल

पत्तियों में पाया जाने वाला हरे रंग का पदार्थ, जो प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण करने में सहायता करता है, क्लोरोफिल कहलाता है।

6. रंध्र

पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्र रंध्र कहलाते हैं।

7. परजीवी

जो जीव अपना भोजन प्राप्त करने के लिए किसी जीवित जीव पर निर्भर रहता है, वह परजीवी कहलाता है।

8. पोषी

जिस जीव से परजीवी भोजन प्राप्त करता है, उसे पोषी कहते हैं।

9. कीटभक्षी पौधे

जो पौधे कीटों को पकड़कर उनसे आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करते हैं, वे कीटभक्षी पौधे कहलाते हैं।

10. मृतजीवी

जो जीव मृत एवं सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं, वे मृतजीवी कहलाते हैं।

11. सहजीवी संबंध

जब दो अलग-अलग जीव साथ रहकर एक-दूसरे से लाभ प्राप्त करते हैं, तो उसे सहजीवी संबंध कहते हैं।

12. राइजोबियम

राइजोबियम एक जीवाणु है जो दलहनी पौधों की जड़ों की गाँठों में पाया जाता है और नाइट्रोजन की उपलब्धता में सहायता करता है।


47. एक नजर में पूरा अध्याय ⭐

पादपों में पोषण

⬇️

पोषण

→ स्वपोषी
→ विषमपोषी

स्वपोषी पोषण

→ प्रकाश संश्लेषण
→ CO₂ + जल
→ सूर्य का प्रकाश
→ क्लोरोफिल
→ कार्बोहाइड्रेट + O₂

विषमपोषी पोषण

→ परजीवी
→ कीटभक्षी
→ मृतजीवी
→ सहजीवी

परजीवी

→ अमरबेल

कीटभक्षी

→ घटपर्णी
→ वीनस फ्लाईट्रैप
→ सनड्यू

मृतजीवी

→ कवक
→ मशरूम
→ ब्रेड की फफूँद

सहजीवी

→ लाइकेन = शैवाल + कवक
→ दलहनी पौधे + राइजोबियम


48. बहुत महत्वपूर्ण उदाहरण ⭐

पोषण/प्रक्रियाउदाहरण
स्वपोषीहरे पौधे
परजीवीअमरबेल
कीटभक्षीघटपर्णी
मृतजीवीकवक
सहजीवीलाइकेन
नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायकराइजोबियम
दलहनी पौधेचना, मटर, मूँग, सेम

49. परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. जीवों को भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: जीवों को भोजन ऊर्जा प्राप्त करने, वृद्धि एवं विकास करने तथा शरीर की मरम्मत और विभिन्न जीवन-क्रियाओं के लिए आवश्यक पदार्थ प्राप्त करने के लिए चाहिए।

प्रश्न 2. स्वपोषी और विषमपोषी में अंतर बताइए।

उत्तर:

स्वपोषी: अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
उदाहरण—हरे पौधे।

विषमपोषी: अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते और दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं।
उदाहरण—मनुष्य, अमरबेल।


प्रश्न 3. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक चार चीजें लिखिए।

उत्तर:

  1. सूर्य का प्रकाश

  2. क्लोरोफिल

  3. कार्बन डाइऑक्साइड

  4. जल


प्रश्न 4. पत्तियों को पौधे की खाद्य फैक्ट्री क्यों कहते हैं?

उत्तर: पत्तियों में क्लोरोफिल होता है और वे सूर्य के प्रकाश की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाती हैं। इसलिए पत्तियों को पौधे की खाद्य फैक्ट्री कहते हैं।


प्रश्न 5. रंध्र क्या हैं?

उत्तर: पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों को रंध्र कहते हैं। इनके द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड अंदर जाती है तथा गैसों का आदान-प्रदान होता है।


प्रश्न 6. अमरबेल को परजीवी पौधा क्यों कहते हैं?

उत्तर: अमरबेल में क्लोरोफिल नहीं होता और यह अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकती। यह दूसरे जीवित पौधे से भोजन प्राप्त करती है। इसलिए इसे परजीवी पौधा कहते हैं।


प्रश्न 7. कीटभक्षी पौधे कीटों को क्यों खाते हैं?

उत्तर: कुछ स्थानों की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है। ऐसे पौधे अपनी नाइट्रोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए कीटों से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।


प्रश्न 8. कवक अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तर: कवक मृत एवं सड़े-गले जैव पदार्थों पर पाचक पदार्थ छोड़कर उन्हें सरल एवं घुलनशील पदार्थों में बदलते हैं और फिर उन्हें अवशोषित करते हैं।


प्रश्न 9. लाइकेन क्या है?

उत्तर: लाइकेन शैवाल और कवक का सहजीवी संघ है। शैवाल भोजन बनाता है और कवक जल, खनिज तथा रहने का स्थान उपलब्ध कराने में सहायता करता है।


प्रश्न 10. राइजोबियम का क्या महत्व है?

उत्तर: राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ों की गाँठों में पाया जाने वाला जीवाणु है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप में उपलब्ध कराने में सहायता करता है।


50. याद रखने की सबसे आसान Trick 🧠

"अमर–घट–कवक–लाइकेन"

  • अमरबेल → परजीवी

  • घटपर्णी → कीटभक्षी

  • कवक → मृतजीवी

  • लाइकेन → सहजीवी

और प्रकाश संश्लेषण के लिए याद रखें:

"प्रकाश + क्लोरोफिल + CO₂ + जल = भोजन + O₂"


 अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण सार

हरे पौधे स्वपोषी होते हैं। वे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन निकलती है। कुछ पौधे अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते और दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं। अमरबेल परजीवी, घटपर्णी कीटभक्षी, कवक मृतजीवी तथा लाइकेन सहजीवी पोषण के उदाहरण हैं। दलहनी पौधों की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन की उपलब्धता में सहायता करते हैं।

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