अध्याय 2 — व्यापार से साम्राज्य तक 8th इतिहास

 

अध्याय 2 — व्यापार से साम्राज्य तक

कक्षा 8 इतिहास — हमारे अतीत–III



1. अध्याय का परिचय

18वीं शताब्दी के आरंभ में मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा था। इसी समय भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का प्रभाव बढ़ रहा था।

अंग्रेज पहले भारत में व्यापार करने आए थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय राज्यों की राजनीति में हस्तक्षेप करना शुरू किया और अंततः भारत के बड़े हिस्से पर अपना शासन स्थापित कर लिया।

मुख्य बात

व्यापार → राजनीतिक हस्तक्षेप → युद्ध → क्षेत्रीय विजय → राजस्व पर नियंत्रण → साम्राज्य की स्थापना


2. मुगल साम्राज्य का कमजोर होना

1707 ई. में मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु हुई।

उनकी मृत्यु के बाद:

  • मुगल साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति कमजोर होने लगी।

  • बड़े-बड़े जमींदार और क्षेत्रीय शासक शक्तिशाली होने लगे।

  • कई क्षेत्रों में स्वतंत्र या अर्ध-स्वतंत्र राज्य बनने लगे।

  • बंगाल, अवध और हैदराबाद जैसे राज्य शक्तिशाली हो गए।

  • दिल्ली का मुगल दरबार पहले जैसा शक्तिशाली नहीं रहा।

परिणाम

भारत में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और यूरोपीय कंपनियों को अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला।


3. अंग्रेज भारत में व्यापार करने कैसे आए?

ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 1600 ई. में चार्टर प्रदान किया।

इस चार्टर के माध्यम से कंपनी को पूर्व के देशों के साथ व्यापार करने का अधिकार मिला।

कंपनी का मुख्य उद्देश्य

सस्ती कीमत पर भारत से वस्तुएँ खरीदना और यूरोप में उन्हें अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाना था।


4. भारत की प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ

यूरोप में भारतीय वस्तुओं की बहुत माँग थी।

मुख्य वस्तुएँ थीं—

  • सूती कपड़ा

  • रेशम

  • मसाले

  • काली मिर्च

  • लौंग

  • इलायची

  • दालचीनी

  • नील आदि।

भारतीय वस्त्रों की यूरोप में विशेष रूप से बहुत अधिक माँग थी।


5. यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के बीच प्रतियोगिता

भारत में केवल अंग्रेज ही व्यापार नहीं करते थे।

अन्य यूरोपीय कंपनियाँ भी भारत आईं—

  • पुर्तगाली

  • डच

  • अंग्रेज

  • फ्रांसीसी

इन कंपनियों के बीच भारतीय व्यापार पर अधिकार प्राप्त करने के लिए प्रतियोगिता होने लगी।

प्रतियोगिता का परिणाम

कंपनियाँ:

  • व्यापारिक लाभ के लिए एक-दूसरे से संघर्ष करती थीं।

  • जहाजों को रोकती थीं।

  • व्यापारिक रास्तों पर कब्जा करने का प्रयास करती थीं।

  • स्थानीय शासकों से राजनीतिक संबंध बनाती थीं।

  • अपनी सेनाएँ रखने लगीं।

इस प्रकार व्यापार धीरे-धीरे राजनीतिक शक्ति में बदलने लगा।


6. बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी

अंग्रेजों ने बंगाल में अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ाईं।

1651 ई.

ईस्ट इंडिया कंपनी ने हुगली नदी के किनारे अपनी पहली अंग्रेजी फैक्ट्री स्थापित की।

यहाँ फैक्ट्री का अर्थ आधुनिक कारखाना नहीं था।
उस समय फैक्ट्री का अर्थ कंपनी का व्यापारिक केंद्र/गोदाम था।

व्यापारी और कंपनी के अधिकारी यहाँ रहते थे तथा सामान का भंडारण करते थे।


7. कंपनी को व्यापारिक सुविधाएँ

ईस्ट इंडिया कंपनी मुगल शासकों से व्यापार करने की विशेष सुविधाएँ प्राप्त करने लगी।

कंपनी ने विभिन्न शासकों से:

  • व्यापारिक छूट

  • करों में रियायत

  • जमीन

  • व्यापारिक अधिकार

प्राप्त किए।


8. फरमान क्या था?

फरमान (Farman)

फरमान का अर्थ है— शासक द्वारा जारी किया गया आधिकारिक आदेश।

मुगल शासक द्वारा दिए गए फरमानों से कंपनी को व्यापार करने में कई सुविधाएँ मिलीं।


9. औरंगजेब का फरमान

औरंगजेब ने कंपनी को कुछ वस्तुओं के शुल्क-मुक्त व्यापार की सुविधा दी थी।

लेकिन कंपनी के अधिकारी इसका गलत इस्तेमाल करने लगे।

कंपनी के अधिकारी निजी व्यापार भी करते थे और कई बार शुल्क देने से बचते थे।

परिणाम

बंगाल सरकार को मिलने वाला राजस्व कम होने लगा।

इससे बंगाल के नवाब और कंपनी के बीच तनाव बढ़ने लगा।


10. बंगाल के नवाब और कंपनी के बीच संघर्ष

औरंगजेब की मृत्यु के बाद बंगाल के नवाब अपनी शक्ति बढ़ाने लगे।

बंगाल के महत्वपूर्ण नवाबों में—

  • मुर्शिद कुली खान

  • अलीवर्दी खान

  • सिराजुद्दौला

का नाम प्रमुख है।

नवाब कंपनी की बढ़ती शक्ति से चिंतित थे।


11. कंपनी द्वारा किलेबंदी

ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल में अपने व्यापारिक केंद्रों को मजबूत करने के लिए किलेबंदी शुरू कर दी।

कंपनी ने:

  • किले मजबूत किए।

  • सैनिकों की संख्या बढ़ाई।

  • हथियार जमा किए।

  • व्यापारिक केंद्रों को सुरक्षित बनाया।

बंगाल के नवाब ने कंपनी को किलेबंदी रोकने का आदेश दिया।

लेकिन कंपनी ने इस आदेश को नहीं माना।


12. प्लासी का युद्ध — 1757 ई.

प्लासी का युद्ध कब हुआ?

23 जून 1757 ई.

किनके बीच?

सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच।

अंग्रेजी सेना का नेतृत्व

रॉबर्ट क्लाइव

बंगाल के नवाब

सिराजुद्दौला


13. सिराजुद्दौला और कंपनी का संघर्ष

1756 ई. में सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना।

वह कंपनी की बढ़ती शक्ति से नाराज था।

उसने कंपनी को:

  • किलेबंदी रोकने

  • राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप न करने

  • व्यापारिक विशेषाधिकारों का दुरुपयोग न करने

का आदेश दिया।

कंपनी ने नवाब के आदेशों को नहीं माना।

इससे संघर्ष बढ़ गया।


14. प्लासी के युद्ध में विश्वासघात

प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला की सेना संख्या में बड़ी थी, लेकिन उसके सेनापति मीर जाफर ने युद्ध में सिराजुद्दौला का साथ नहीं दिया।

रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर के साथ समझौता कर लिया था।

परिणाम

सिराजुद्दौला की हार हुई।

मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया गया।


15. प्लासी के युद्ध का महत्व

प्लासी की विजय अंग्रेजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।

इसके बाद:

  • बंगाल में कंपनी का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा।

  • कंपनी को बहुत धन मिला।

  • कंपनी ने बंगाल के प्रशासन में हस्तक्षेप करना शुरू किया।

  • अंग्रेजों की सैन्य शक्ति बढ़ी।

  • भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की नींव मजबूत हुई।

याद रखें

1757 = प्लासी का युद्ध


16. मीर जाफर और मीर कासिम

मीर जाफर कंपनी की माँगें पूरी नहीं कर पाया।

कंपनी को लगातार अधिक धन और सुविधाएँ चाहिए थीं।

इस कारण कंपनी ने मीर जाफर को हटाकर मीर कासिम को बंगाल का नवाब बनाया।

लेकिन बाद में मीर कासिम भी कंपनी से संघर्ष करने लगा।


17. बक्सर का युद्ध — 1764 ई.

कंपनी और भारतीय शासकों के बीच संघर्ष बढ़ता गया।

बक्सर का युद्ध

1764 ई.

इस युद्ध में कंपनी का सामना हुआ—

  • मीर कासिम

  • अवध के नवाब शुजाउद्दौला

  • मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय

से।

ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना विजयी हुई।


18. दीवानी का अधिकार — 1765 ई.

1765 ई. में मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्रदान की।

दीवानी का अर्थ

राजस्व वसूलने का अधिकार।

इससे कंपनी को इन क्षेत्रों से राजस्व प्राप्त करने का अधिकार मिल गया।

महत्व

अब कंपनी केवल व्यापारिक संस्था नहीं रही। वह एक राजस्व वसूलने वाली राजनीतिक शक्ति बन गई।


19. कंपनी के पास धन कैसे आया?

दीवानी मिलने के बाद कंपनी को भारत से बहुत अधिक राजस्व प्राप्त होने लगा।

इस धन से कंपनी:

  • अपनी सेना का खर्च उठाती थी।

  • हथियार खरीदती थी।

  • प्रशासन चलाती थी।

  • भारत से वस्तुएँ खरीदती थी।

  • युद्धों का खर्च उठाती थी।

इस प्रकार भारत का राजस्व भारत में अंग्रेजी सत्ता को मजबूत करने में इस्तेमाल होने लगा।


20. कंपनी के अफसर 'नवाब' बन बैठे

कंपनी के कई अधिकारी भारत से बहुत धन कमाकर इंग्लैंड लौटते थे।

वे बहुत आलीशान जीवन जीते थे।

उन्हें इंग्लैंड में व्यंग्य से “नवाब” कहा जाने लगा।

कारण

वे भारत से बहुत धन लेकर जाते थे और अमीरों जैसा जीवन बिताते थे।


21. कंपनी का फैलता शासन

1757 से 1857 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपना शासन तेजी से बढ़ाया।

कंपनी ने केवल युद्ध के माध्यम से ही राज्यों पर कब्जा नहीं किया।

उसने कई प्रकार के साधनों का इस्तेमाल किया—

1. युद्ध

सैनिक शक्ति का प्रयोग।

2. संधियाँ

भारतीय शासकों से समझौते।

3. कूटनीति

एक राज्य को दूसरे के विरुद्ध इस्तेमाल करना।

4. सहायक संधि

भारतीय राज्यों को कंपनी की सेना रखने के लिए मजबूर करना।

5. राजनीतिक हस्तक्षेप

राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना।


22. सहायक संधि

लॉर्ड वेलेजली ने सहायक संधि की नीति को व्यापक रूप से अपनाया।

इसके अनुसार भारतीय शासक को—

  • कंपनी की सेना अपने राज्य में रखनी पड़ती थी।

  • उस सेना का खर्च देना पड़ता था।

  • किसी अन्य विदेशी शक्ति से संबंध रखने पर कंपनी की अनुमति आवश्यक थी।

  • कंपनी के प्रभाव को स्वीकार करना पड़ता था।

यदि शासक कंपनी की सेना का खर्च नहीं दे पाता था तो उसके राज्य का कुछ हिस्सा कंपनी अपने अधिकार में ले सकती थी।


23. रेजिडेंट कौन था?

कंपनी भारतीय राज्यों में अपना एक अधिकारी नियुक्त करती थी जिसे रेजिडेंट (Resident) कहा जाता था।

रेजिडेंट का कार्य

  • भारतीय शासक पर नजर रखना।

  • कंपनी के हितों की रक्षा करना।

  • राज्य के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करना।

  • कंपनी की नीतियों को लागू करवाना।

धीरे-धीरे रेजिडेंट भारतीय राज्यों में बहुत प्रभावशाली हो गए।


24. मैसूर और अंग्रेज

दक्षिण भारत में मैसूर एक शक्तिशाली राज्य बन गया था।

मैसूर के प्रमुख शासक थे—

हैदर अली

और उनके पुत्र—

टीपू सुल्तान

टीपू सुल्तान अंग्रेजों के विस्तार का विरोध करते थे।


25. टीपू सुल्तान — “शेर-ए-मैसूर”

टीपू सुल्तान मैसूर के प्रसिद्ध शासक थे।

उन्हें “शेर-ए-मैसूर” कहा जाता था।

उन्होंने:

  • अंग्रेजों का विरोध किया।

  • अपनी सेना को आधुनिक बनाने का प्रयास किया।

  • फ्रांसीसी व्यापारियों से संबंध बनाए।

  • मैसूर के व्यापार को बढ़ावा दिया।

  • स्थानीय व्यापारियों के साथ संबंध मजबूत किए।


26. अंग्रेजों और मैसूर के युद्ध

अंग्रेजों और मैसूर के बीच चार युद्ध हुए—

  1. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध — 1767–1769

  2. द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध — 1780–1784

  3. तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध — 1790–1792

  4. चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध — 1799

1799

चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु हो गई।

इसके बाद अंग्रेजों का मैसूर पर प्रभाव बढ़ गया।


27. टीपू सुल्तान की रॉकेट तकनीक

टीपू सुल्तान की सेना में लोहे के खोल वाले रॉकेट इस्तेमाल किए जाते थे।

यह उस समय की युद्ध तकनीक में महत्वपूर्ण माना जाता है।

अंग्रेजों ने बाद में इस तकनीक का अध्ययन किया।


28. मराठों से लड़ाई

18वीं शताब्दी के मध्य में मराठा शक्ति भी बहुत मजबूत थी।

1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद मराठों की शक्ति को झटका लगा, लेकिन बाद में वे फिर शक्तिशाली हुए।

मराठा संघ में कई शक्तिशाली सरदार थे—

  • सिंधिया

  • होल्कर

  • गायकवाड़

  • भोंसले

इनके ऊपर पेशवा का महत्वपूर्ण स्थान था।


29. अंग्रेज-मराठा युद्ध

अंग्रेजों और मराठों के बीच तीन प्रमुख युद्ध हुए—

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध

1775–1782

द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध

1803–1805

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध

1817–1819

तीसरे युद्ध के बाद मराठों की राजनीतिक शक्ति का अंत हो गया और भारत के बड़े हिस्से पर कंपनी का नियंत्रण स्थापित हो गया।


30. सर्वोच्चता का दावा

19वीं शताब्दी की शुरुआत में कंपनी ने यह दावा करना शुरू किया कि उसकी सत्ता भारतीय राज्यों से सर्वोच्च है।

इस नीति के अंतर्गत कंपनी भारतीय राज्यों पर अपने अधिकार को बढ़ाने लगी।

लॉर्ड हेस्टिंग्स

1813–1823 के दौरान गवर्नर-जनरल रहे।

उनके समय में कंपनी ने सर्वोच्चता की नीति को आगे बढ़ाया।


31. कित्तूर की रानी चेन्नम्मा

अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति का विरोध करने वालों में कित्तूर की रानी चेन्नम्मा भी थीं।

उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया।

  • अंग्रेजों ने कित्तूर पर अधिकार करने का प्रयास किया।

  • रानी चेन्नम्मा ने विरोध किया।

  • उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

  • बाद में 1829 में जेल में उनकी मृत्यु हो गई।

उनका संघर्ष अंग्रेजी शासन के विरुद्ध प्रारंभिक प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण है।


32. कंपनी के शासन का विस्तार — मुख्य तरीका

कंपनी ने भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने के लिए तीन मुख्य तरीकों का इस्तेमाल किया—

① प्रत्यक्ष सैन्य विजय

युद्ध करके राज्य पर कब्जा।

② सहायक संधि

राज्य को कंपनी के अधीन बनाना।

③ सर्वोच्चता की नीति

कंपनी को सर्वोच्च शक्ति मानने के लिए भारतीय राज्यों पर दबाव डालना।


33. महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्षघटना
1600ईस्ट इंडिया कंपनी को चार्टर मिला
1707औरंगजेब की मृत्यु
1756सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना
1757प्लासी का युद्ध
1764बक्सर का युद्ध
1765कंपनी को दीवानी मिली
1767–69प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध
1775–82प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
1780–84द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
1790–92तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
1799टीपू सुल्तान की मृत्यु
1803–05द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध
1817–19तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
1829रानी चेन्नम्मा की मृत्यु
1857ब्रिटिश शासन के विरुद्ध बड़ा विद्रोह

34. महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

⭐ औरंगजेब

मुगल सम्राट, जिनकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा।

⭐ रॉबर्ट क्लाइव

ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकारी जिसने प्लासी के युद्ध में कंपनी की सेना का नेतृत्व किया।

⭐ सिराजुद्दौला

बंगाल का नवाब, जिसे 1757 में प्लासी के युद्ध में हार का सामना करना पड़ा।

⭐ मीर जाफर

सिराजुद्दौला का सेनापति, जिसे प्लासी के बाद बंगाल का नवाब बनाया गया।

⭐ मीर कासिम

बंगाल का नवाब जिसने कंपनी के विरुद्ध संघर्ष किया।

⭐ शाह आलम द्वितीय

मुगल सम्राट जिसने 1765 में कंपनी को दीवानी प्रदान की।

⭐ टीपू सुल्तान

मैसूर के शासक और अंग्रेजों के प्रमुख विरोधियों में से एक।

⭐ लॉर्ड वेलेजली

सहायक संधि की नीति को व्यापक रूप से लागू करने वाला गवर्नर-जनरल।

⭐ लॉर्ड हेस्टिंग्स

सर्वोच्चता की नीति को आगे बढ़ाने वाला गवर्नर-जनरल।

⭐ रानी चेन्नम्मा

कित्तूर की शासिका, जिन्होंने अंग्रेजों का विरोध किया।


35. कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
साम्राज्यविशाल क्षेत्र पर किसी शक्ति का शासन
व्यापारवस्तुओं की खरीद-बिक्री
कंपनीव्यापार करने वाली संस्था
फरमानशासक का आधिकारिक आदेश
फैक्ट्रीउस समय का व्यापारिक केंद्र
किलेबंदीसुरक्षा के लिए किला मजबूत करना
राजस्वसरकार को प्राप्त होने वाला कर/आय
दीवानीराजस्व वसूलने का अधिकार
संधिदो पक्षों के बीच समझौता
रेजिडेंटकंपनी का राजनीतिक प्रतिनिधि
सर्वोच्चतासबसे ऊँची सत्ता
कूटनीतिराजनीतिक संबंधों से अपने हित साधना
अधीनस्थकिसी उच्च सत्ता के नियंत्रण में
व्यावसायिकव्यापार से संबंधित
प्रतिद्वंद्वीप्रतियोगिता करने वाला
सहायक संधिकंपनी की शर्तों पर भारतीय राज्य के साथ समझौता

36. पूरे अध्याय का सारांश

1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने आई। शुरुआत में उसका उद्देश्य केवल व्यापार और मुनाफा कमाना था। भारत से सूती कपड़ा, रेशम, मसाले आदि यूरोप भेजे जाते थे।

मुगल साम्राज्य के कमजोर होने के बाद कंपनी ने भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करना शुरू किया। बंगाल में कंपनी और नवाब के बीच संघर्ष बढ़ा।

1757 में प्लासी के युद्ध में कंपनी ने सिराजुद्दौला को हराया। इसके बाद कंपनी का बंगाल में राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया।

1764 में बक्सर के युद्ध में कंपनी की विजय हुई और 1765 में उसे बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई।

इसके बाद कंपनी ने अपनी सेना और धन की मदद से भारतीय राज्यों पर अपना प्रभाव बढ़ाया।

कंपनी ने मैसूर, मराठों और अन्य भारतीय राज्यों के साथ युद्ध किए। टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों का कड़ा विरोध किया, लेकिन 1799 में उनकी मृत्यु हो गई।

कंपनी ने सहायक संधि, रेजिडेंट व्यवस्था और सर्वोच्चता की नीति के माध्यम से भी भारतीय राज्यों को अपने नियंत्रण में लिया।

इस प्रकार एक व्यापारिक कंपनी धीरे-धीरे एक राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गई तथा भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार करने लगी।


⭐ परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें

1600 → ईस्ट इंडिया कंपनी को चार्टर
1757 → प्लासी का युद्ध
1764 → बक्सर का युद्ध
1765 → दीवानी अधिकार
1799 → टीपू सुल्तान की मृत्यु
1817–19 → तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
1857 → बड़ा विद्रोह

एक लाइन में पूरा अध्याय:

“अंग्रेज भारत में व्यापार करने आए, लेकिन धीरे-धीरे युद्ध, कूटनीति, संधियों और राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से उन्होंने भारत में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।”

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