📚 पाठ – 2 : गोल

 

📚 पाठ – 2 : गोल

✍️ लेखक – मेजर ध्यानचंद

1. पाठ का संक्षिप्त परिचय

‘गोल’ मेजर ध्यानचंद की आत्मकथा का एक अंश है। इसमें उन्होंने अपने हॉकी जीवन, खेल के प्रति लगन, मेहनत, खेल भावना और 1936 के बर्लिन ओलंपिक की विजय के बारे में बताया है। ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।


📝 पाठ के महत्वपूर्ण नोट्स

1. मेजर ध्यानचंद का जन्म

  • मेजर ध्यानचंद का जन्म सन् 1904 में प्रयाग में हुआ था।

  • उनका परिवार साधारण था।

  • लगभग 16 वर्ष की उम्र में वे ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए।

2. हॉकी की शुरुआत

  • रेजिमेंट में हॉकी का खेल काफी प्रसिद्ध था।

  • शुरू में ध्यानचंद की हॉकी में कोई विशेष रुचि नहीं थी।

  • उनके रेजिमेंट के सूबेदार मेजर तिवारी उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करते थे।

  • धीरे-धीरे अभ्यास करते हुए वे हॉकी के अच्छे खिलाड़ी बन गए।

3. खेल भावना

  • एक मैच में विरोधी टीम के खिलाड़ी ने ध्यानचंद के सिर पर हॉकी स्टिक मार दी।

  • मैदान से बाहर जाने के बाद उन्होंने उस खिलाड़ी से कहा कि वह चिंता न करे और वे इसका बदला जरूर लेंगे।

  • बाद में उन्होंने उस खिलाड़ी को चोट पहुँचाने के बजाय छह गोल करके अपना बदला लिया।

  • इससे पता चलता है कि ध्यानचंद क्रोध के बजाय खेल भावना और अच्छे व्यवहार में विश्वास रखते थे।

4. सफलता का रहस्य

ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं—

  • लगन

  • साधना

  • खेल भावना

  • निरंतर अभ्यास

  • मेहनत और अनुशासन

5. बर्लिन ओलंपिक, 1936

  • सन् 1936 में बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद को भारतीय हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया।

  • उनके शानदार खेल से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहना शुरू कर दिया।

  • भारतीय हॉकी टीम ने बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता।

  • ध्यानचंद हमेशा मानते थे कि जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत है।

6. ध्यानचंद की महानता

ध्यानचंद का मानना था कि खेल में व्यक्तिगत स्वार्थ से अधिक टीम भावना और देश का सम्मान महत्वपूर्ण है। उनकी मेहनत, अनुशासन और खेल भावना ने उन्हें महान खिलाड़ी बनाया।


📖 शब्दार्थ

शब्दअर्थ
धक्का-मुक्कीएक-दूसरे को धक्का देना
नोक-झोंकहल्की तकरार
मुकाबलाप्रतियोगिता
प्रतिद्वंद्वीविरोधी
कोशिशप्रयास
गुस्साक्रोध
बदलाप्रतिशोध
शर्मिंदालज्जित
बुराईखराबी/दोष
सफलताकामयाबी
मंत्रउपाय/सफलता का साधन
लगनकिसी काम के प्रति गहरी रुचि
साधनानिरंतर अभ्यास
भर्तीसेवा में शामिल होना
रेजिमेंटसैनिकों की टुकड़ी
दिलचस्पीरुचि
सूबेदारसेना का एक पद
नौसिखियानया सीखने वाला
तरक्कीउन्नति
कप्तानटीम का प्रमुख खिलाड़ी
प्रभावितकिसी के गुण से आकर्षित होना
जादूगरबहुत कुशल व्यक्ति
ओलंपिकविश्व स्तर की खेल प्रतियोगिता
स्वर्ण पदकसोने का पदक
आत्मकथाअपने जीवन की कहानी
खेल भावनाखेल में निष्पक्षता, अनुशासन और भाईचारे की भावना

⭐ परीक्षा में आने योग्य 10 Subjective Questions

1. मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा जाता है?

2. मेजर ध्यानचंद के सफलता के मंत्र क्या थे?

3. ध्यानचंद के जीवन में सूबेदार मेजर तिवारी का क्या योगदान था?

4. ध्यानचंद ने विरोधी खिलाड़ी से बदला किस प्रकार लिया? इससे उनकी किस विशेषता का पता चलता है?

5. मेजर ध्यानचंद की हॉकी में रुचि कैसे बढ़ती गई?

6. बर्लिन ओलंपिक 1936 में भारतीय हॉकी टीम की क्या उपलब्धि रही?

7. मेजर ध्यानचंद खेलते समय किस बात का विशेष ध्यान रखते थे?

8. ध्यानचंद के अनुसार खेल में ‘खेल भावना’ का क्या महत्व है?

9. मेजर ध्यानचंद के जीवन से हमें क्या-क्या सीख मिलती है?

10. ‘गोल’ पाठ के आधार पर मेजर ध्यानचंद के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

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