📚 पाठ – दो गौरैया
लेखक – भीष्म साहनी
📝 पाठ के महत्वपूर्ण नोट्स
1. पाठ का सारांश
इस पाठ में एक परिवार और दो गौरैयों की कहानी बताई गई है। घर में माँ, पिताजी और लेखक रहते हैं। उनके आँगन में एक आम का पेड़ है, जिस पर तरह-तरह के पक्षी आते रहते हैं।
दो गौरैयाँ घर में बार-बार आती हैं। वे कभी रोशनदान पर बैठती हैं, कभी खिड़की पर और कभी घर के अंदर आ जाती हैं। पिताजी को उनका घर में आना बिल्कुल पसंद नहीं था। वे गौरैयों को भगाने के लिए कभी ताली बजाते और कभी लाठी लेकर उन्हें बाहर निकालते थे।
गौरैयों ने घर के पंखे के ऊपर अपना घोंसला बना लिया। पिताजी ने कई बार उनका घोंसला हटाया, लेकिन गौरैयाँ बार-बार वापस आ जाती थीं। माँ को गौरैयों पर दया आती थी और वह पिताजी की हरकतों पर हँसती थी।
एक दिन पिताजी ने घोंसला पूरी तरह तोड़ने की कोशिश की। घोंसले में गौरैयों के छोटे-छोटे बच्चे थे। गौरैयाँ अपने बच्चों के लिए बार-बार वापस आती रहीं। अंत में पिताजी का मन बदल गया। उन्होंने गौरैयों को रहने दिया।
इस पाठ से हमें पक्षियों के प्रति प्रेम, दया और सहानुभूति रखने की सीख मिलती है।
📖 महत्वपूर्ण शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| गौरैया | एक छोटी चिड़िया |
| सराय | यात्रियों के ठहरने का स्थान |
| मेहमान | अतिथि |
| मालिक | स्वामी |
| आँगन | घर के बीच या सामने का खुला स्थान |
| पक्षी | चिड़िया |
| पहाड़ियाँ | छोटी पर्वत श्रेणियाँ |
| घाटियाँ | पहाड़ों के बीच का नीचा स्थान |
| शोर | बहुत अधिक आवाज |
| मचाना | बहुत अधिक करना/फैलाना |
| पर्दे | दरवाजे या खिड़की पर लगाए जाने वाले कपड़े |
| बीसियाँ | बहुत अधिक संख्या में |
| धमा-चौकड़ी | बहुत अधिक उछल-कूद |
| मचाना | करना |
| बर्तन | खाने-पीने या काम में आने के पात्र |
| डिब्बे | छोटी पेटियाँ |
| प्याले | कप या छोटे बर्तन |
| अँगीठी | आग जलाने का छोटा साधन |
| सर्दी | ठंड का मौसम |
| बाथरूम | स्नान करने का कमरा |
| झाँकना | छिपकर या थोड़ा बाहर निकलकर देखना |
| शिकार | पकड़ने या मारने योग्य जीव |
| रोशनदान | दीवार के ऊपरी भाग में बना छोटा प्रकाश/हवा का रास्ता |
| निरीक्षण | ध्यान से देखना |
| योग्य | लायक |
| घोंसला | पक्षियों का रहने का घर |
| बिस्तर | सोने का सामान |
| सामान | उपयोग की वस्तुएँ |
| व्यंग्य | मजाक या कटाक्ष के रूप में कही गई बात |
| गंभीरता | गंभीर होने का भाव |
| अंदा | पक्षी का अंडा |
| चिड़िया | छोटी पक्षी |
| झट | तुरंत |
| चोंच | पक्षियों के मुँह का आगे का कठोर भाग |
| परिचय | पहचान |
| तंग आना | परेशान हो जाना |
| सहनशीलता | सहने की क्षमता |
| नष्ट | बर्बाद/खत्म |
| टुकड़े | छोटे भाग |
| तिनके | घास या पौधे के सूखे छोटे डंठल |
| फड़फड़ाना | पंख तेजी से हिलाना |
| फुरफुराते | तेजी से हिलते/उड़ते हुए |
| लाठी | लकड़ी की छड़ी |
| हमदर्दी | दूसरे के दुख को अपना दुख समझना |
| मुस्कराना | हल्की हँसी हँसना |
| मौजूद | उपस्थित |
| दया | करुणा |
| स्वतंत्र | आजाद |
| सजावट | सुंदर बनाने की क्रिया |
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पाठ 2: दो गौरैया
लेखक – भीष्म साहनी
महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर
नीचे पाठ के अभ्यास और परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। पाठ के अभ्यास में समझ, मिलान, सोच-विचार, अनुमान और संवाद आदि कई प्रकार के प्रश्न हैं।
🟢 1. पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि?
उत्तर: पिताजी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उनके घर में अनेक प्रकार के पक्षी और जीव-जंतु रहते और आते-जाते थे। उन्हें लगता था कि घर के असली मालिक तो यही जीव-जंतु हैं और वे स्वयं मेहमान हैं।
🟢 2. कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
उत्तर: कहानी में घर के असली मालिक जीव-जंतुओं को कहा गया है, क्योंकि वे घर में स्वतंत्र रूप से रहते थे और आते-जाते रहते थे।
🟢 3. गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
उत्तर: पिताजी गौरैयों को घर से निकालना चाहते थे और बार-बार उन्हें भगाने का प्रयास करते थे। इसके विपरीत माँ गौरैयों को घर से निकालना नहीं चाहती थीं। वे पिताजी की कोशिशों पर हँसती और मजाक करती थीं।
🟢 4. माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
उत्तर: इससे पता चलता है कि माँ को पिताजी की गौरैयों को भगाने की कोशिश व्यर्थ लगती थी। वे गौरैयों को घर से निकालना नहीं चाहती थीं और उनकी गतिविधियों को देखकर उन्हें हँसी आती थी।
🟢 5. गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
उत्तर: गौरैयों के बार-बार लौटने को निरंतर प्रयास करते रहने और हार न मानने से जोड़ा जा सकता है। वे बार-बार भगाए जाने के बाद भी अपने घर और बच्चों के पास लौट आती थीं।
🟡 सोच-विचार के प्रश्न
6. लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर: गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया था। संभवतः उन्होंने वहाँ घोंसला इसलिए बनाया क्योंकि वह स्थान ऊँचा, सुरक्षित और उनके बच्चों के लिए सुविधाजनक था।
7. क्या पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं?
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षी भी अपने परिवार और घर का महत्व समझते हैं। कहानी में गौरैयाँ बार-बार अपने घोंसले में लौटती हैं और अपने बच्चों को छोड़कर नहीं जातीं। जब उनके बच्चों की चीं-चीं सुनाई देती है, तो उनके माता-पिता तुरंत उनके पास पहुँच जाते हैं।
8. “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: इस कथन से पिताजी के दृढ़ निश्चयी, जिद्दी, मेहनती और हार न मानने वाले स्वभाव का पता चलता है। वे अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए बार-बार प्रयास करते हैं।
9. गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया?
उत्तर: जब पिताजी उनका घोंसला तोड़ने लगे और उनके बच्चों को खतरा महसूस हुआ, तब गौरैयाँ चहकना बंद करके चुपचाप दीवार पर बैठ गईं। वे पहले की तरह प्रसन्न नहीं थीं और कुछ दुबली तथा काली भी दिखाई देने लगी थीं।
10. गौरैयों ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया?
उत्तर: गौरैयाँ—
खुले दरवाजे से,
दरवाजे के नीचे की खाली जगह से,
टूटे हुए शीशे वाले रोशनदान से
घर में प्रवेश करती थीं।
11. इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको कैसे पता चला?
उत्तर: इस कहानी को लेखक स्वयं सुना रहा है। यह बात इसलिए पता चलती है क्योंकि कहानी में लेखक ने अपने लिए ‘मैं’ शब्द का प्रयोग किया है और वह घटनाओं को स्वयं देखता तथा उनका वर्णन करता है।
12. माँ बार-बार क्यों कह रही थीं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर: माँ समझ गई थीं कि गौरैयों ने घोंसला बना लिया है और संभवतः उसमें अंडे या बच्चे हैं। इसलिए वे अपने घोंसले और बच्चों को छोड़कर नहीं जाएँगी।
🟠 अनुमान और कल्पना
13. माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की?
उत्तर: माँ गौरैयों को घर से निकालना नहीं चाहती थीं। उन्हें गौरैयों पर दया आती थी और वे समझती थीं कि गौरैयाँ अपने घोंसले तथा बच्चों के कारण बार-बार लौट रही हैं। इसलिए उन्होंने पिताजी की सहायता नहीं की।
14. “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को आश्चर्य क्यों हुआ?
उत्तर: लेखक को आश्चर्य इसलिए हुआ क्योंकि पिताजी घोंसला तोड़ रहे थे, तभी उसे घोंसले में से नन्हीं गौरैयाओं के बच्चे दिखाई दिए। वे अपने माता-पिता को पुकारते हुए चीं-चीं कर रहे थे। यह दृश्य देखकर लेखक आश्चर्यचकित रह गया।
15. कहानी के अंत में पिताजी का हृदय क्यों बदल गया?
उत्तर: जब पिताजी घोंसला तोड़ रहे थे, तब उन्हें उसमें से नन्हे गौरैया के बच्चों की चीं-चीं सुनाई दी। बच्चों को देखकर उनके मन में दया और ममता जाग उठी। उन्होंने लाठी रख दी और गौरैयों को घर में रहने दिया। अंत में वे उन्हें देखकर मुसकराने लगे।
16. कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया, प्रेम और सहानुभूति रखनी चाहिए। सभी जीवों को अपने घर और परिवार से प्रेम होता है। हमें उनके साथ प्रेमपूर्वक और संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए।
🔵 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
17. ‘दो गौरैया’ कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर:
‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी है। कहानी में लेखक के घर में माँ, पिताजी और लेखक रहते हैं। उनके घर में अनेक पक्षी और जीव-जंतु भी आते-जाते रहते हैं। इसी कारण पिताजी घर को सराय कहते हैं।
एक दिन दो गौरैयाँ घर में आकर पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। पिताजी उन्हें घर से निकालना चाहते हैं, जबकि माँ उन्हें निकालने के पक्ष में नहीं होतीं। पिताजी बार-बार गौरैयों को भगाते हैं, लेकिन वे फिर वापस आ जाती हैं।
अंत में पिताजी गौरैयों का घोंसला तोड़ने लगते हैं। तभी उन्हें घोंसले में मौजूद नन्हे बच्चों की चीं-चीं सुनाई देती है। बच्चों को देखकर पिताजी का हृदय बदल जाता है। वे लाठी रख देते हैं और गौरैयों को घर में रहने देते हैं।
इस कहानी का मुख्य संदेश है कि हमें पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, दया और सहानुभूति रखनी चाहिए।
18. माँ और पिताजी के स्वभाव में अंतर बताइए।
| माँ | पिताजी |
|---|---|
| हँसमुख थीं। | जल्दी गुस्सा हो जाते थे। |
| दयालु और सहानुभूतिशील थीं। | जिद्दी और दृढ़ निश्चयी थे। |
| गौरैयों को रहने देना चाहती थीं। | गौरैयों को निकालना चाहते थे। |
| पिताजी की कोशिशों पर हँसती थीं। | गौरैयों को भगाने के लिए बार-बार प्रयास करते थे। |
| अंत में भी माँ गौरैयों के पक्ष में रहीं। | अंत में पिताजी का हृदय बदल गया। |
⭐ परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण 5 प्रश्न
पिताजी ने घर को सराय क्यों कहा?
गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी का व्यवहार कैसा था?
गौरैयाँ बार-बार घर में क्यों लौटती थीं?
पिताजी का हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?
‘दो गौरैया’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
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