प्रश्न 1. सर्वान् श्लोकान् सस्वरं गायत।
इसका लिखित उत्तर नहीं होता, बल्कि पाठ के सभी श्लोकों का सस्वर (उच्चारण सहित) पाठ किया जाता है।
लिखने के लिए आप सभी 6 श्लोक लिख सकते हैं:
(1)
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥
(2)
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्॥
(3)
दाने तपसि शौर्ये च विज्ञाने विनये नये।
विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा॥
(4)
सर्वत्रैव सहासीत सर्वः कुर्वीत सुहृतिम्।
सर्वत्रविवादे मैत्रीं च नासद्भिः किञ्चिदाचरेत्॥
(5)
धनधान्यप्रयोगेषु विद्यायाः संग्रहेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्॥
(6)
क्षमावशीकृते लोके क्षमया किं न साध्यते।
शान्तिखड्गः करे यस्य किं करिष्यति दुर्जनः॥
प्रश्न 1. सर्वान् श्लोकान् सस्वरं गायत।
हिंदी अर्थ (भावार्थ):
पृथ्वी पर तीन ही सच्चे रत्न हैं—जल, अन्न और सुभाषित (अच्छे वचन)। मूर्ख लोग पत्थरों के टुकड़ों को ही रत्न मानते हैं।
सत्य के बल पर पृथ्वी टिकी हुई है, सत्य के कारण सूर्य चमकता है और वायु बहती है। समस्त संसार सत्य पर ही आधारित है।
दान, तप, शौर्य, ज्ञान, विनय और नीति पर कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पृथ्वी अनेक गुणवान लोगों से भरी हुई है।
सज्जनों के साथ मित्रता करनी चाहिए और सबके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। दुष्ट लोगों के साथ विवाद या मित्रता नहीं करनी चाहिए।
धन के उपयोग, विद्या प्राप्त करने, भोजन करने और व्यवहार करने में लज्जा नहीं करनी चाहिए। ऐसा व्यक्ति सुखी रहता है।
क्षमा से संसार को वश में किया जा सकता है। जिसके हाथ में शांति और क्षमा की तलवार हो, उसका दुष्ट व्यक्ति भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
2. यथायोग्यं श्लोकांशान् मेलयत
| क | ख |
|---|---|
| धनधान्यप्रयोगेषु | विद्यायाः संग्रहेषु च |
| विस्मयो न हि कर्तव्यः | बहुरत्ना वसुन्धरा |
| सत्येन धार्यते पृथ्वी | सत्येन तपते रविः |
| सर्वत्रविवादं मैत्रीं च | नासद्भिः किञ्चिदाचरेत् |
| आहारे व्यवहारे च | त्यक्तलज्जः सुखी भवेत् |
3. एकपदेन उत्तरत
(क) पृथिव्यां कति रत्नानि?
उत्तर: त्रीणि।
(ख) मूढः कुत्र रत्नसंज्ञां विधीयते?
उत्तर: पाषाणखण्डेषु।
(ग) पृथिवी केन धार्यते?
उत्तर: सत्येन।
(घ) के सुहितं कुर्वन्ति?
उत्तर: सन्तः।
(ङ) लोके वशीकृतिः का?
उत्तर: क्षमा।
4. रेखांकितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) सत्येन वाति वायुः।
उत्तर: केन वाति वायुः?
(ख) सन्तः एव सहासीत।
उत्तर: केः एव सहासीत?
(ग) वसुन्धरा बहुला भवति।
उत्तर: का बहुला भवति?
(घ) विद्यायाः संग्रहेषु त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
उत्तर: केषु त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्?
(ङ) सन्तः मैत्रीं कुर्वन्ति।
उत्तर: केः मैत्रीं कुर्वन्ति?
5. प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) कः विस्मयः न कर्तव्यः?
उत्तर: दाने तपसि शौर्ये च विज्ञाने विनये नये च विस्मयः न कर्तव्यः।
(ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि?
उत्तर: जलम्, अन्नम्, सुभाषितम्।
(ग) त्यक्तलज्जः कुत्र सुखी भवेत्?
उत्तर: धनधान्यप्रयोगेषु, विद्यायाः संग्रहेषु, आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
6. लिङ्गानुसारं लिखत
पुल्लिङ्गम् :
रविः
वायुः
सन्तः
स्त्रीलिङ्गम् :
पृथ्वी
वसुन्धरा
नपुंसकलिङ्गम् :
रत्नानि
सत्यम्
सुहितम्
7. अधोलिखितपदेषु धातवः
| पदम् | धातुः |
|---|---|
| करोति | कृ |
| पश्य | दृश् |
| भवेत् | भू |
| तिष्ठति | स्था |
पाठ 1 – सुभाषितानि
प्रश्न 2 से 7 तक (हिंदी में)
2. उचित श्लोकांशों का मिलान कीजिए
धन-धान्य के उपयोग में → विद्या के संग्रह में भी।
आश्चर्य नहीं करना चाहिए → क्योंकि पृथ्वी अनेक रत्नों से भरी है।
सत्य से पृथ्वी धारण की जाती है → सत्य से सूर्य तपता है।
दुष्टों के साथ → किसी प्रकार का व्यवहार नहीं करना चाहिए।
भोजन और व्यवहार में → लज्जा छोड़ने वाला सुखी होता है।
3. एक शब्द में उत्तर दीजिए
(क) पृथ्वी पर कितने रत्न हैं?
उत्तर: तीन।
(ख) मूर्ख लोग कहाँ रत्न मानते हैं?
उत्तर: पत्थरों में।
(ग) पृथ्वी किससे धारण की जाती है?
उत्तर: सत्य से।
(घ) हित (भलाई) कौन करते हैं?
उत्तर: सज्जन।
(ङ) संसार को वश में करने वाली क्या है?
उत्तर: क्षमा।
4. रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाइए
(क) वायु किसके द्वारा बहती है?
उत्तर: केन वाति वायुः?
(ख) कौन साथ बैठता है?
उत्तर: केः सह आसीत?
(ग) कौन बहुत रत्नों वाली है?
उत्तर: का बहुला भवति?
(घ) किन विषयों में लज्जा छोड़ने वाला सुखी होता है?
उत्तर: केषु त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्?
(ङ) मित्रता कौन करते हैं?
उत्तर: केः मैत्रीं कुर्वन्ति?
5. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) किस बात पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए?
उत्तर: दान, तप, शौर्य, ज्ञान, विनय और नीति पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
(ख) पृथ्वी पर तीन रत्न कौन-कौन से हैं?
उत्तर: जल, अन्न और सुभाषित (अच्छे वचन)।
(ग) लज्जा छोड़ने वाला कहाँ सुखी होता है?
उत्तर: धन-धान्य के उपयोग, विद्या के संग्रह, भोजन और व्यवहार में।
6. लिंग के अनुसार शब्द लिखिए
पुल्लिंग:
रवि
वायु
सन्त
स्त्रीलिंग:
पृथ्वी
वसुन्धरा
नपुंसकलिंग:
रत्न
सत्यम्
सुहितम्
7. निम्न शब्दों की धातु लिखिए
| शब्द | धातु |
|---|---|
| करोति | कृ |
| पश्य | दृश् |
| भवेत् | भू |
| तिष्ठति | स्था |
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