पाठ 7 – अपूर्व अनुभव 7th

पाठ 7 – अपूर्व अनुभव

अपने मन से बनाए गए 10 महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1.

तोतो-चान कैसी लड़की थी?

उत्तर:
तोतो-चान साहसी, दयालु, मेहनती और सच्ची मित्र थी। वह दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती थी।


प्रश्न 2.

यासुकी-चान की सबसे बड़ी इच्छा क्या थी?

उत्तर:
यासुकी-चान की सबसे बड़ी इच्छा पेड़ पर चढ़कर ऊपर से दुनिया को देखना थी।


प्रश्न 3.

तोतो-चान ने यासुकी-चान की सहायता कैसे की?

उत्तर:
तोतो-चान चौकीदार से सीढ़ी लाई और अपनी पूरी मेहनत से यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाया।


प्रश्न 4.

तोतो-चान ने अपनी योजना किसी को क्यों नहीं बताई?

उत्तर:
क्योंकि उसे डर था कि बड़े लोग उसे रोक देंगे और यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने नहीं देंगे।


प्रश्न 5.

पेड़ पर पहुँचकर दोनों बच्चों ने क्या किया?

उत्तर:
दोनों ने पेड़ की शाखा पर बैठकर बातें कीं, हँसे और सुंदर दृश्य का आनंद लिया।


प्रश्न 6.

यासुकी-चान तोतो-चान पर भरोसा क्यों करता था?

उत्तर:
क्योंकि तोतो-चान उसकी सच्ची मित्र थी और हमेशा उसकी मदद करती थी।


प्रश्न 7.

इस कहानी में सच्ची मित्रता का कौन-सा उदाहरण मिलता है?

उत्तर:
तोतो-चान ने अपने मित्र की इच्छा पूरी करने के लिए कठिन मेहनत की। यही सच्ची मित्रता का सबसे अच्छा उदाहरण है।


प्रश्न 8.

कहानी का सबसे भावुक प्रसंग कौन-सा है?

उत्तर:
जब तोतो-चान बहुत मेहनत के बाद यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने में सफल हुई और उसका स्वागत किया।


प्रश्न 9.

इस कहानी से हमें कौन-कौन से गुण सीखने चाहिए?

उत्तर:
हमें दया, सहयोग, मित्रता, साहस, मेहनत और दूसरों की सहायता करने का गुण सीखना चाहिए।


प्रश्न 10.

'अपूर्व अनुभव' शीर्षक क्यों उपयुक्त है?

उत्तर:
क्योंकि इस कहानी में यासुकी-चान ने पहली बार पेड़ पर चढ़ने का अनोखा अनुभव प्राप्त किया और तोतो-चान ने किसी की इच्छा पूरी करने की खुशी का अनुभव किया। इसलिए इसका शीर्षक "अपूर्व अनुभव" बिल्कुल उपयुक्त है।





कक्षा 7 – हिंदी

पाठ 7 : अपूर्व अनुभव

पाठ से प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1.

यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने के लिए तोतो-चान ने अथक प्रयास क्यों किया?

उत्तर:
यासुकी-चान पोलियो से पीड़ित था और वह स्वयं पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। उसकी पेड़ पर चढ़ने की बहुत इच्छा थी। तोतो-चान उसकी सच्ची मित्र थी, इसलिए उसने उसकी इच्छा पूरी करने के लिए सीढ़ी लाकर और लगातार प्रयास करके उसे अपने पेड़ पर चढ़ाया।


प्रश्न 2.

दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोतो-चान और यासुकी-चान को अपूर्व अनुभव मिला। इन दोनों के अपूर्व अनुभव अलग-अलग थे। दोनों में क्या अंतर था?

उत्तर:

  • तोतो-चान का अपूर्व अनुभव यह था कि उसने पहली बार किसी असंभव-से कार्य को मेहनत और साहस से सफल बनाया।

  • यासुकी-चान का अपूर्व अनुभव यह था कि वह पहली बार किसी पेड़ पर चढ़ा और ऊपर से दुनिया को देखने का आनंद प्राप्त किया।


प्रश्न 3.

कभी सूरज का तेज ताप था और दोनों पसीने से तर थे, तो कभी बादल की छाया उन्हें धूप से बचा रही थी। आपके अनुसार ऐसा क्यों हुआ?

उत्तर:
दोनों बच्चों ने काफी देर तक लगातार मेहनत की। इस दौरान मौसम बदलता रहा। कभी तेज धूप निकली तो कभी बादल आ गए। इसलिए कभी वे पसीने से भीग गए और कभी बादलों की छाया ने उन्हें धूप से बचा लिया।


प्रश्न 4.

'यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका था।' इस वाक्य को पूरा कीजिए और बताइए कि लेखिका ने ऐसा क्यों लिखा होगा?

उत्तर:
पूरा वाक्य: "यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका था।"

लेखिका ने ऐसा इसलिए लिखा क्योंकि यासुकी-चान पोलियो से पीड़ित था। उसके लिए दोबारा पेड़ पर चढ़ना संभव नहीं था। इसलिए यह अनुभव उसके जीवन का पहला और शायद अंतिम अवसर था।


पाठ से आगे

प्रश्न 1.

आप किस प्रकार की सफलता के लिए तीव्र इच्छा, बुद्धि और कठोर परिश्रम करना चाहते हैं?

उत्तर:
मैं अपने जीवन में अच्छी शिक्षा प्राप्त कर एक सफल व्यक्ति बनना चाहता/चाहती हूँ। इसके लिए मैं पूरी लगन, बुद्धि और कठोर परिश्रम से पढ़ाई करूँगा/करूँगी तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करूँगा/करूँगी।


प्रश्न 2.

यदि आपको अपने आसपास के संसार में कोई रोमांचकारी अनुभव प्राप्त करना हो, तो आप कैसे प्राप्त करेंगे?

उत्तर:
मैं सुरक्षित तरीके से प्रकृति की सैर, पहाड़ों की यात्रा, जंगल सफारी, संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थानों का भ्रमण करूँगा/करूँगी। नई-नई चीज़ें सीखकर और अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन में रोमांचकारी अनुभव प्राप्त करूँगा/करूँगी।


अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.

अपनी माँ से झूठ बोलते समय तोतो-चान की नज़रें नीचे क्यों थीं?

उत्तर:
तोतो-चान जानती थी कि वह अपनी माँ से झूठ बोल रही है। उसे अपराधबोध और संकोच हो रहा था। इसलिए वह माँ की आँखों में नहीं देख सकी और उसकी नज़रें नीचे झुकी हुई थीं।

Post a Comment

0 Comments