हम पंछी उन्मुक्त गगन के” Class 7th NCERT
📘 ✍️ प्रश्न-उत्तर (15) Prem Sir
1. पंछी पिंजरे में क्यों नहीं रहना चाहते?
👉 क्योंकि उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है और वे खुलकर उड़ना चाहते हैं।
2. ‘उन्मुक्त गगन’ का क्या अर्थ है?
👉 खुला और स्वतंत्र आकाश।
3. पंछी क्या करना चाहते हैं?
👉 खुले आकाश में उड़ना और स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं।
4. पिंजरे की सुविधाएँ होने पर भी पक्षी खुश क्यों नहीं हैं?
👉 क्योंकि स्वतंत्रता के बिना सुख का कोई महत्व नहीं है।
5. “कनक-तिलियों” से क्या तात्पर्य है?
👉 सोने के पिंजरे की सलाखें।
6. पंछी क्या खाकर भी संतुष्ट नहीं हैं?
👉 सोने के बर्तन में रखा भोजन (कनक-कटोरे का मैदा)।
7. पंछियों को किस प्रकार का जीवन पसंद है?
👉 स्वतंत्र और प्राकृतिक जीवन।
8. “स्वर्ण-शृंखला के बंधन” का क्या अर्थ है?
👉 सोने की जंजीर यानी सुंदर लेकिन बंधन वाला जीवन।
9. पंछी क्या भूल जाते हैं बंधन में?
👉 अपनी उड़ान और स्वतंत्रता।
10. कवि ने “नीले नभ की सीमा पाने” से क्या भाव बताया है?
👉 ऊँचाइयों तक उड़ने और अपनी सीमाएँ पार करने की इच्छा।
11. पंछी क्या चुगना चाहते हैं?
👉 तारों जैसे अनार के दाने (कल्पनात्मक स्वतंत्रता का आनंद)।
12. “क्षितिज मिलन बन जाता” का क्या अर्थ है?
👉 दूर का आकाश और धरती मिलते हुए दिखाई देते हैं।
13. कवि का मुख्य संदेश क्या है?
👉 स्वतंत्रता सबसे बड़ा सुख है।
14. पंछी किन चीजों को छोड़ना नहीं चाहते?
👉 अपनी उड़ान और स्वतंत्रता।
15. मनुष्य को इस कविता से क्या सीख मिलती है?
👉 हमें स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए और किसी को बंधन में नहीं रखना चाहिए।
📖 ✨ शब्दार्थ (15)
उन्मुक्त – स्वतंत्र
गगन – आकाश
पिंजरबद्ध – पिंजरे में बंद
कनक – सोना
तिलियाँ – पतली छड़ें (सलाखें)
पुलकित – प्रसन्न
स्वर्ण-शृंखला – सोने की जंजीर
बंधन् – कैद
नभ – आकाश
क्षितिज – जहाँ आकाश और धरती मिलते दिखते हैं
नीड़ – घोंसला
आश्रय – सहारा
विघ्न – बाधा
आकुल – बेचैन
डोरी – रस्सी / बंधन
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